प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। उनके इस संबोधन को लेकर देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इससे पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने संकेत दिया था कि वे महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे। प्रधानमंत्री ने जनसभा में कहा कि वे देशवासियों, खासकर महिलाओं और आम परिवारों के बीच अपना दुख साझा करना चाहते हैं। इस बयान के बाद माना जा रहा है कि उनका संबोधन सीधे तौर पर लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास न हो पाने से जुड़ा होगा।
लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) बिल पारित नहीं हो सका। यह बिल सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। इसमें लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव शामिल था। साथ ही महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की बात कही गई थी। सरकार का दावा था कि इस कदम से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सीधी हिस्सेदारी सुनिश्चित होगी।
हालांकि मतदान के दौरान यह बिल आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। संवैधानिक संशोधन बिल होने के कारण इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की जरूरत थी। आवश्यक संख्या पूरी न होने के कारण यह बिल सदन में पास नहीं हो सका। यह नतीजा केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि मोदी सरकार ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी मंच से कहा कि उन्होंने विपक्ष से साफ शब्दों में कहा था कि यदि वे चाहें तो इस बिल का पूरा श्रेय ले सकते हैं। उनका उद्देश्य केवल इतना था कि सामान्य परिवारों से आने वाली महिलाएं संसद और विधानसभाओं तक पहुंच सकें। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक नेक प्रयास था, लेकिन विपक्ष के रवैये के कारण यह सफल नहीं हो सका। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि देश इस मुद्दे पर सब कुछ देख रहा है और जनता उचित समय पर फैसला करेगी।
सूत्रों के मुताबिक शनिवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के सामने विपक्ष के रुख पर नाराजगी जताई। बताया जा रहा है कि उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन न करके विपक्ष ने बड़ी राजनीतिक भूल की है और आने वाले समय में उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सरकार अब इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाने की रणनीति पर काम कर सकती है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में एक बार फिर झूठ का जाल बुनेंगे। ममता बनर्जी ने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर जो बिल लाया गया था, उसका वास्तविक उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं बल्कि राजनीतिक लाभ लेना था। उनके अनुसार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन के जरिए भाजपा उन राज्यों में फायदा लेना चाहती थी जहां उसकी राजनीतिक स्थिति कमजोर है।
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने विपक्ष के विरोध को देश की एकता और संघीय ढांचे की रक्षा से जोड़ा। उनका कहना है कि यदि सीटों का पुनर्निर्धारण राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर किया जाता है, तो इससे कई राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि विपक्ष ने बिल का विरोध किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मोदी सरकार के 12 साल के शासनकाल में यह पहला बड़ा मौका है जब सरकार सदन में कोई अहम बिल पारित कराने में असफल रही है। इससे पहले सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक आसानी से पारित कराती रही है, लेकिन इस बार विपक्ष एकजुट दिखाई दिया। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और लोकप्रिय मुद्दे पर भी सरकार संख्या बल नहीं जुटा सकी, जिससे संसद के भीतर उसकी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
इस बिल के पास न होने का एक बड़ा असर यह माना जा रहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण अब तत्काल लागू नहीं हो पाएगा। नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने तक इस व्यवस्था को लागू करना मुश्किल माना जा रहा है। इसका मतलब यह है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं को इस आरक्षण का लाभ मिलने की संभावना कम हो गई है।
सरकार ने इसी से जुड़े दो अन्य विधेयक भी सदन में वोटिंग के लिए पेश नहीं किए। इनमें परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल 2026 शामिल थे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ये दोनों विधेयक मुख्य महिला आरक्षण बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग से मतदान की जरूरत नहीं थी। हालांकि विपक्ष ने इसे सरकार की रणनीतिक हार बताते हुए सवाल उठाए हैं।
अब देश की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज रात होने वाले संबोधन पर टिकी है। माना जा रहा है कि वे महिला आरक्षण बिल, विपक्ष के रुख, संसद की कार्यवाही और आगे की रणनीति पर विस्तार से अपनी बात रख सकते हैं। यह संबोधन आने वाले दिनों की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। महिला आरक्षण के मुद्दे ने एक बार फिर देश की राजनीति को गर्मा दिया है और अब देखना होगा कि जनता इस पर किस पक्ष के तर्क को ज्यादा स्वीकार करती है।


