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भादरा में फर्जी आधार सेंटर का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड कुलदीप शर्मा गिरफ्तार

भादरा में फर्जी आधार सेंटर का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड कुलदीप शर्मा गिरफ्तार

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र में एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे आधार कार्ड सेंटर पर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में फर्जी बायोमेट्रिक्स तकनीक का इस्तेमाल कर आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड कुलदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं, क्योंकि इस तरह से तैयार किए गए पहचान पत्रों का इस्तेमाल गंभीर अपराधों और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में किया जा सकता था।

एडीजी ATS एवं AGTF दिनेश एम.एन. के अनुसार, आरोपी कुलदीप शर्मा ने भादरा में नगर पालिका के पास एक अवैध आधार कार्ड सेंटर खोल रखा था। यहां पर वह दूसरे लोगों की अधिकृत ऑपरेटर आईडी का गलत इस्तेमाल करके आधार कार्ड से जुड़े कार्य कर रहा था। आरोपी के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें और गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद ATS की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई और शुक्रवार शाम को छापा मारकर आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी के दौरान जांच टीम को मौके से बड़ी संख्या में एनरोलमेंट रसीदें बरामद हुईं, जिससे यह साफ संकेत मिला कि लंबे समय से इस सेंटर पर अवैध तरीके से आधार कार्ड बनाए जा रहे थे। इसके अलावा टीम ने कई हाईटेक उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल बायोमेट्रिक सिस्टम को धोखा देने के लिए किया जा रहा था। बरामद सामान में लैपटॉप, प्रिंटर, कैमरा, आईरिस डिवाइस, पाम फिंगरप्रिंट डिवाइस, जीपीएस डिवाइस, फिंगरप्रिंट डाई और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं।

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी कुलदीप शर्मा बेहद सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा चला रहा था। वह जसवंत और आमिर खान नाम के ऑपरेटरों की आईडी का अवैध उपयोग कर आधार प्रणाली में लॉगिन करता था। इसके लिए नकली फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल किया जाता था। ATS को मौके से लाल और सफेद रंग के रबर से बने डमी फिंगरप्रिंट भी मिले हैं। इनका उपयोग सिस्टम में असली ऑपरेटर के रूप में प्रवेश पाने के लिए किया जाता था।

सिर्फ फिंगरप्रिंट ही नहीं, आरोपी ने आंखों की रेटिना स्कैन प्रणाली को भी चकमा देने का तरीका अपना रखा था। जांच में सामने आया कि उसने कागज पर आंखों की रेटिना की फोटो कॉपियां तैयार कर रखी थीं, जिन्हें आईरिस डिवाइस के सामने रखकर सिस्टम को भ्रमित किया जाता था। इस तरीके से वह बायोमेट्रिक सत्यापन को पार कर आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी करता था। यह खुलासा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद गंभीर माना जा रहा है।

जांच टीम को यह भी पता चला कि एनरोलमेंट रसीदों पर ऑपरेटरों के हस्ताक्षर भी फर्जी किए जा रहे थे। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, कुलदीप शर्मा खुद ही दूसरे लोगों के हस्ताक्षर बनाकर दस्तावेजों को वैध दिखाने की कोशिश करता था। इससे स्पष्ट है कि यह कार्य अकेले नहीं बल्कि पूरी योजना और तकनीकी समझ के साथ किया जा रहा था।

ATS और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फर्जी तरीके से बनाए गए आधार कार्ड का इस्तेमाल कई प्रकार के अपराधों में किया जा सकता था। इन पहचान पत्रों के जरिए फर्जी सिम कार्ड लिए जा सकते थे, बैंक खातों का संचालन किया जा सकता था, ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा सकता था और साइबर अपराधों को नई पहचान देकर छिपाया जा सकता था। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह मामला बेहद संवेदनशील है, क्योंकि किसी भी गलत व्यक्ति के हाथ में वैध पहचान दस्तावेज पहुंचना गंभीर खतरा बन सकता है।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी कुलदीप शर्मा से भादरा पुलिस और ATS की संयुक्त टीम पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने इस अवैध सेंटर के माध्यम से आधार कार्ड बनवाए थे। यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी के साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे तथा इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है।

जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप का फोरेंसिक परीक्षण कर रही हैं। डिजिटल रिकॉर्ड्स के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि अब तक कितने लोगों के दस्तावेज बनाए गए, किन नामों से आवेदन किए गए और किन क्षेत्रों तक यह नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह के तार किसी अंतरराज्यीय नेटवर्क या संगठित साइबर अपराधियों से तो नहीं जुड़े हैं।

इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने आधार सेवाओं से जुड़े अधिकृत केंद्रों की निगरानी बढ़ाने के संकेत दिए हैं। साथ ही आम लोगों से भी अपील की गई है कि आधार कार्ड से जुड़े कार्य केवल अधिकृत केंद्रों पर ही करवाएं और किसी संदिग्ध सेंटर की जानकारी तुरंत पुलिस या प्रशासन को दें।

भादरा में हुए इस खुलासे ने दिखा दिया है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह सरकारी प्रणालियों के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि ATS और पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़े फर्जीवाड़े पर रोक लगी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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