मध्यप्रदेश के कूनों नेशनल पार्क से छोड़े गए अफ्रीकी चीतों की गतिविधियां लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसी क्रम में एक बार फिर नर चीता केपी-2 अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलकर राजस्थान पहुंच गया है। बुधवार रात यह चीता चम्बल नदी पार करते हुए कोटा जिले के रास्ते रणथम्भौर टाइगर रिजर्व की सीमा में प्रवेश कर गया। गुरुवार सुबह इसकी मौजूदगी सवाईमाधोपुर जिले के पालीघाट और फलौदी रेंज क्षेत्र में दर्ज की गई, जिसके बाद वन विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं और चीते की लगातार ट्रैकिंग शुरू कर दी गई।
वन अधिकारियों के अनुसार केपी-2 की लोकेशन सबसे पहले ग्रामीणों ने देखी। सुबह अजीतपुरा गांव के लोगों ने बताया कि एक चीता गांव की सड़क पर घूमता नजर आया। ग्रामीणों ने पहले इसे तेंदुआ समझा, लेकिन नजदीक से देखने पर स्पष्ट हुआ कि यह अफ्रीकी चीता है। सूचना तेजी से वन विभाग तक पहुंची, जिसके बाद पालीघाट रेंज और फलौदी रेंज की टीमें तत्काल मौके पर रवाना हुईं। बताया गया कि गांव में कुछ समय रुकने के बाद चीता खेतों की ओर बढ़ गया और फिर आसपास के खुले क्षेत्र में चला गया।
चीते के गांव के नजदीक पहुंचने से ग्रामीणों में उत्सुकता के साथ हल्की चिंता भी देखी गई। हालांकि वन विभाग ने लोगों से अपील की कि वे चीते के पास न जाएं, भीड़ न लगाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चीता सामान्य परिस्थितियों में इंसानों पर हमला नहीं करता, लेकिन जंगली जानवर होने के कारण उसके व्यवहार का अनुमान लगाना आसान नहीं होता। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है।
पालीघाट रेंजर किशनकुमार सांखला और फलौदी रेंजर विजय मीणा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में निगरानी तेज कर दी है। साथ ही कूनों नेशनल पार्क से भी विशेषज्ञ टीम रणथम्भौर पहुंच गई है। यह टीम रेडियो कॉलर और अन्य तकनीकी माध्यमों की मदद से केपी-2 की सटीक लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि चीते की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उसे सुरक्षित तरीके से वापस ले जाने की योजना बनाई जाएगी।
जानकारी के मुताबिक केपी-2 बुधवार रात चम्बल नदी पार कर राजस्थान में दाखिल हुआ। पहले यह कोटा जिले की सीमा में पहुंचा और फिर रात के अंधेरे में आगे बढ़ते हुए सवाईमाधोपुर जिले तक पहुंच गया। चूंकि यह इलाका जंगल, खेत और खुली जमीन से जुड़ा है, इसलिए चीते के लिए लंबी दूरी तय करना आसान माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चीते स्वभाव से तेज रफ्तार और लंबी दूरी तय करने वाले जानवर होते हैं, इसलिए उनका बड़े क्षेत्र में घूमना असामान्य नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब केपी-2 राजस्थान पहुंचा हो। इससे पहले 19 मार्च को भी यह चीता कोटा जिले की सीमा में पहुंच गया था। उस समय करीब आठ दिन तक यह कोटा क्षेत्र में घूमता रहा। बाद में 27 मार्च को वन विभाग और कूनों की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर इसे ट्रैंकुलाइज किया और वापस कूनों नेशनल पार्क ले जाया गया था। अब कुछ ही सप्ताह बाद इसका फिर से राजस्थान पहुंचना वन विभाग के लिए नई चुनौती बन गया है।
वन अधिकारियों के अनुसार केपी-2 के अलावा अन्य चीतों की गतिविधियां भी निगरानी में हैं। केपी-3 नामक दूसरे चीते का मूवमेंट भी राजस्थान के बारां जिले में लगातार दर्ज किया जा रहा है। हाल ही में उसकी लोकेशन अटरू और छबड़ा क्षेत्र में ट्रेस की गई थी। इससे साफ है कि कूनों से छोड़े गए कुछ चीते बड़े दायरे में घूम रहे हैं और नए इलाकों की तलाश कर रहे हैं।
करीब आठ महीने पहले कूनों की मादा चीता ज्वाला भी मध्यप्रदेश से निकलकर सवाईमाधोपुर जिले के बालेर रेंज क्षेत्र तक पहुंच गई थी। वह लगभग 130 किलोमीटर की दूरी तय करके राजस्थान आई थी। उस दौरान उसने एक बाड़े में बकरी का शिकार किया था, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे ट्रैंकुलाइज कर वापस कूनों पहुंचाया था। इस घटना ने भी चीतों की लंबी दूरी तय करने की क्षमता को सामने रखा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए वातावरण में छोड़े गए चीते अक्सर बड़े क्षेत्र में घूमकर अपने लिए उपयुक्त आवास, भोजन और सुरक्षित इलाका तलाशते हैं। यह प्राकृतिक व्यवहार है। हालांकि जब वे आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंचते हैं, तब मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए ऐसे मामलों में वन विभाग की त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है।
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व पहले से ही बाघों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में चीते का यहां पहुंचना वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्सुकता का विषय है, लेकिन प्रशासन के लिए यह संवेदनशील स्थिति भी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चीता सुरक्षित रहे, स्थानीय लोग सुरक्षित रहें और किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
फिलहाल वन विभाग की टीमें केपी-2 की सटीक लोकेशन पता लगाने में जुटी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गश्त की जा रही है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। आने वाले समय में यह तय किया जाएगा कि चीते को रणथम्भौर क्षेत्र में कुछ समय रहने दिया जाए या फिर ट्रैंकुलाइज कर दोबारा कूनों नेशनल पार्क वापस भेजा जाए। फिलहाल सबकी नजर इस पर है कि केपी-2 आगे किस दिशा में बढ़ता है और वन विभाग उसे किस तरह सुरक्षित नियंत्रित करता है।


