अक्षय तृतीया का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है और इसे धन, समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। अक्षय तृतीया के अवसर पर सोना खरीदने की परंपरा सदियों पुरानी है और हर साल इस दिन बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिलती है। खासकर ज्वेलरी शॉप्स पर ग्राहकों की भीड़ इस बात का प्रमाण होती है कि इस दिन सोना खरीदना लोगों के लिए न केवल आस्था का विषय है, बल्कि एक सुरक्षित निवेश विकल्प भी माना जाता है।
हालांकि इस बार अक्षय तृतीया का माहौल पिछले वर्षों से कुछ अलग नजर आ रहा है। 19 अप्रैल को मनाए जाने वाले इस पर्व से पहले ही सोने की कीमतों में आई भारी तेजी ने आम ग्राहकों के बजट पर असर डाला है। बीते एक साल में भारतीय स्पॉट मार्केट में सोने के दाम करीब 60 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, जो इसे एक महंगा लेकिन आकर्षक निवेश विकल्प बनाता है। यह लगातार नौवां साल है जब सोने ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और भी मजबूत हुई है।
इस साल की शुरुआत में जनवरी महीने में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। प्रति 10 ग्राम कीमत 1.80 लाख रुपये के पार चली गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। हालांकि इसके बाद बाजार में कुछ गिरावट देखने को मिली और फिलहाल कीमतें करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई हैं। यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली के कारण आई, जहां निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद अपनी होल्डिंग्स को बेचकर लाभ कमाया। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी सोने के दामों को प्रभावित किया है।
भारत में धनतेरस के बाद अक्षय तृतीया को सोना खरीदने का दूसरा सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस दिन सोने की खरीदारी को न केवल शुभ माना जाता है, बल्कि इसे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में भी देखा जाता है। इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि अक्षय तृतीया के आसपास सोने की कीमतें 1.45 लाख से 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकती हैं। यदि पिछले साल की तुलना की जाए, जब कीमतें लगभग 96 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम थीं, तो यह वृद्धि निवेशकों के लिए बड़े फायदे का संकेत देती है। पिछले साल इस अवसर पर सोना खरीदने वाले लोग इस समय करीब 60 प्रतिशत तक के लाभ में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में आई इस तेजी के बावजूद इसकी मांग में कमी आने की संभावना कम है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी इसके दामों को समर्थन दे रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए सोना एक सुरक्षित एसेट के रूप में अपनी जगह बनाए हुए है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि निवेश का संतुलन बनाए रखना जरूरी है और कुल पोर्टफोलियो का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में निवेश करना चाहिए।
आज के बदलते दौर में निवेश के विकल्प भी बदल गए हैं। जहां पहले लोग केवल गहनों के रूप में सोना खरीदते थे, वहीं अब डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी लोकप्रिय हो रहे हैं। डिजिटल गोल्ड में निवेश करने का फायदा यह है कि इसमें मेकिंग चार्ज या शुद्धता की चिंता नहीं रहती, जिससे यह एक सुविधाजनक और पारदर्शी विकल्प बन जाता है। खासकर युवा निवेशकों के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
हालांकि अल्पकालिक निवेश के दृष्टिकोण से सोने में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इस साल मार्च में ही सोने की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शॉर्ट टर्म में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ लंबी अवधि यानी 5 से 10 साल के नजरिए से निवेश करने की सलाह देते हैं, जहां सोना स्थिर और सुरक्षित रिटर्न देने में सक्षम साबित होता है।
कुल मिलाकर, अक्षय तृतीया 2026 के मौके पर सोने की खरीदारी को लेकर उत्साह तो बना हुआ है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग पारंपरिक तरीके से गहनों में निवेश कर रहे हैं, वहीं कई निवेशक आधुनिक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इस बार का पर्व यह भी दर्शाता है कि बदलते आर्थिक हालात के बीच भी सोने का आकर्षण बरकरार है और यह निवेश के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा।


