भारत में निवेश की बात जब भी होती है, तो सोना हमेशा से एक भरोसेमंद और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आता है। पारंपरिक रूप से लोग फिजिकल गोल्ड जैसे गहनों, सिक्कों और बिस्कुट के रूप में निवेश करना पसंद करते रहे हैं। इसके पीछे केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव भी एक बड़ा कारण रहा है। हालांकि बदलते समय के साथ अब निवेश के तरीके भी बदल रहे हैं और डिजिटल माध्यमों के जरिए सोने में निवेश का चलन तेजी से बढ़ा है, जिसमें गोल्ड ईटीएफ एक प्रमुख विकल्प बनकर उभरा है।
रिटर्न के लिहाज से देखें तो सोने ने लंबे समय में निवेशकों को निराश नहीं किया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में सोने ने औसतन 9 से 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है, जबकि पिछले 10 वर्षों में यह रिटर्न लगभग 12 प्रतिशत तक रहा है। यही वजह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सोना निवेशकों की पसंद बना हुआ है।
फिजिकल गोल्ड में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे आसानी से खरीदा जा सकता है और यह एक ठोस संपत्ति के रूप में आपके पास रहता है। खासकर भारतीय समाज में शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है। हालांकि इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं। जब कोई व्यक्ति ज्वेलरी के रूप में सोना खरीदता है, तो उसे मेकिंग चार्ज भी देना पड़ता है, जो कई बार 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकता है। यह अतिरिक्त लागत निवेश के कुल रिटर्न को प्रभावित करती है।
इसके अलावा फिजिकल गोल्ड को सुरक्षित रखना भी एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। चोरी या नुकसान का खतरा हमेशा बना रहता है, जिसके चलते कई लोग लॉकर जैसी सुविधाओं का सहारा लेते हैं, जिससे अतिरिक्त खर्च जुड़ जाता है। शुद्धता को लेकर भी अक्सर सवाल उठते हैं और बेचते समय भी कई बार पूरी कीमत नहीं मिल पाती, जिससे निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
दूसरी ओर, गोल्ड ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड ने सोने में निवेश को एक नया और आधुनिक रूप दिया है। यह सुविधा वर्ष 2007 में भारत में शुरू हुई और तब से लगातार लोकप्रिय होती जा रही है। गोल्ड ईटीएफ शेयर बाजार में ट्रेड होने वाले फंड होते हैं, जिनकी कीमत सोने के बाजार भाव से जुड़ी होती है। इससे निवेशकों को बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे ही सोने में निवेश करने का अवसर मिलता है।
गोल्ड ईटीएफ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे खरीदना और बेचना बेहद आसान होता है। निवेशक अपने डीमैट अकाउंट के जरिए कभी भी इसमें निवेश कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत बेच भी सकते हैं। इसमें न तो मेकिंग चार्ज का झंझट होता है और न ही सुरक्षा की चिंता। साथ ही इसकी पारदर्शिता भी अधिक होती है, क्योंकि इसकी कीमत सीधे बाजार से जुड़ी होती है।
हालांकि गोल्ड ईटीएफ में भी कुछ लागत जुड़ी होती है, जिसे फंड मैनेजमेंट फीस कहा जाता है। यह आमतौर पर 0.3 से 1 प्रतिशत के बीच होती है, जिससे कुल रिटर्न में थोड़ी कमी आ सकती है। लेकिन इसके बावजूद लंबे समय में इसका प्रदर्शन फिजिकल गोल्ड के लगभग बराबर ही रहता है।
निवेश के नजरिए से यदि तुलना की जाए, तो दोनों विकल्पों के अपने-अपने फायदे और सीमाएं हैं। यदि कोई निवेशक केवल रिटर्न और सुविधा को ध्यान में रखता है, तो गोल्ड ईटीएफ एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है। इसमें निवेश करना आसान है, जोखिम कम है और पारदर्शिता अधिक है। वहीं यदि किसी व्यक्ति का सोने से भावनात्मक जुड़ाव है या वह इसे गिफ्ट या आभूषण के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, तो फिजिकल गोल्ड अधिक उपयुक्त रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखने के लिए दोनों विकल्पों का संतुलित उपयोग करना चाहिए। इससे जोखिम कम होता है और बेहतर रिटर्न की संभावना भी बढ़ती है।


