पूर्वी राजस्थान की बहुप्रतीक्षित ईसरदा बांध परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बांध का निर्माण कार्य जुलाई तक हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि इस परियोजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह योजना लाखों लोगों की जीवनरेखा से जुड़ी हुई है।
मुख्य सचिव शनिवार को सवाई माधोपुर जिले के दौरे पर थे, जहां उन्होंने परियोजना की प्रगति का जायजा लिया। ईसरदा बांध परियोजना कार्यालय पहुंचने पर जिला कलेक्टर कानाराम और टीना डाबी ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर बांध स्थल का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों तथा प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने साइट इंजीनियरों और फील्ड स्टाफ से सीधे संवाद कर कार्य की स्थिति को समझा और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
करीब 1038.65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही यह परियोजना पूर्वी राजस्थान की राम जल सेतु योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पूरा होने पर सवाई माधोपुर और दौसा जिलों के लाखों लोगों को लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या से राहत मिलेगी। परियोजना के प्रथम चरण में 3.24 टीएमसी जल संग्रहण की क्षमता विकसित की जा रही है, जिससे दौसा जिले के 1079 गांवों और 5 शहरों के साथ-साथ सवाई माधोपुर जिले के 177 गांवों और एक शहर के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। कुल मिलाकर इस चरण में लगभग 35.13 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव ने यह भी बताया कि परियोजना के दूसरे चरण के पूरा होने के बाद इसकी भंडारण क्षमता बढ़कर 10.77 टीएमसी तक पहुंच जाएगी, जिससे जल आपूर्ति की क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी। इसके साथ ही इंटेक वेल और पंप हाउस के माध्यम से दौसा और सवाई माधोपुर के कुल 1256 गांवों को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गेटों की ऊंचाई बढ़ाने और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए।
परियोजना के अंतर्गत लिफ्ट सिस्टम, इंटेक वेल, पंप हाउस, पाइपलाइन नेटवर्क और स्काडा सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मुख्य सचिव ने इन सभी कार्यों को तय समय में पूरा करने पर जोर दिया और कहा कि नियमित निरीक्षण तथा गुणवत्ता की निगरानी बेहद आवश्यक है। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की भी आवश्यकता बताई, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा परियोजना की प्रगति को प्रभावित न कर सके।
निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टर कानाराम, पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी और वरिष्ठ अभियंताओं के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने संकेत दिया कि जून माह में वे एक बार फिर इस परियोजना का निरीक्षण करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्य निर्धारित गति से आगे बढ़ रहा है या नहीं। उनके इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस परियोजना को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी प्रकार की ढिलाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ईसरदा बांध परियोजना के समय पर पूर्ण होने से न केवल क्षेत्र में पेयजल संकट का स्थायी समाधान होगा, बल्कि इससे क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी। बेहतर जल उपलब्धता के कारण कृषि, उद्योग और शहरी विकास के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। इस परियोजना को पूर्वी राजस्थान के जल प्रबंधन और आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
दौरे के दौरान मुख्य सचिव ने टोंक के सर्किट हाउस में भी अधिकारियों की बैठक ली, जहां उन्होंने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन से योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति के बारे में जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना से भी चर्चा की।


