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गर्मियों में Microwave या OTG कौन बेहतर?

गर्मियों में Microwave या OTG कौन बेहतर?

गर्मियों का मौसम शुरू होते ही घर की रसोई सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण जगहों में बदल जाती है। खासतौर पर नौतपा और भीषण गर्मी के दौरान किचन में कुछ मिनट खड़े होकर खाना बनाना भी मुश्किल महसूस होने लगता है। गैस स्टोव की लगातार निकलने वाली गर्मी से रसोई का तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जिससे खाना बनाना थकाने वाला काम बन जाता है। ऐसे में अब लोग केवल गैस चूल्हे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि माइक्रोवेव और ओटीजी जैसे मॉडर्न किचन अप्लायंसेज की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि आखिर गर्मियों में खाना बनाने के लिए माइक्रोवेव ज्यादा बेहतर है या ओटीजी। साथ ही यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि कौन सा उपकरण कम बिजली खर्च करता है और किचन को कम गर्म बनाता है।

आज के समय में माइक्रोवेव और ओटीजी दोनों ही आधुनिक रसोई का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इन दोनों की तकनीक और काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है। यही वजह है कि इनके उपयोग के दौरान गर्मी, बिजली की खपत और कुकिंग एक्सपीरियंस में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। गर्मियों में सही विकल्प चुनना न केवल आरामदायक कुकिंग के लिए जरूरी है बल्कि बिजली के बिल को नियंत्रित रखने में भी मदद कर सकता है।

माइक्रोवेव की बात करें तो यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स की मदद से काम करता है। माइक्रोवेव ओवन खाने के अंदर मौजूद पानी और फैट के मॉलिक्यूल्स को तेजी से वाइब्रेट करता है, जिससे खाना अंदर से गर्म होता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल खाना गर्म होता है, जबकि आसपास की हवा और पूरा किचन ज्यादा गर्म नहीं होता। यही कारण है कि माइक्रोवेव का इस्तेमाल करने पर रसोई का तापमान काफी हद तक नियंत्रित रहता है। खासकर जब केवल खाना गर्म करना हो, सब्जियां स्टीम करनी हों या इंस्टेंट मील तैयार करना हो, तब माइक्रोवेव बेहद सुविधाजनक साबित होता है।

माइक्रोवेव का एक बड़ा फायदा इसकी स्पीड भी है। इसमें ज्यादातर काम कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं। सामान्य तौर पर 2 से 10 मिनट के भीतर खाना गर्म या तैयार हो जाता है। इसके अलावा इसमें प्रीहीटिंग की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे समय और बिजली दोनों की बचत होती है। गर्मियों में यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण बन जाती है, क्योंकि कम समय तक अप्लायंस चलने से किचन में गर्मी कम फैलती है और लंबे समय तक गर्म वातावरण में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

दूसरी तरफ ओटीजी यानी ओवन टोस्टर ग्रिलर पारंपरिक ओवन की तरह काम करता है। इसमें इलेक्ट्रिक हीटिंग रॉड्स लगी होती हैं, जो अत्यधिक गर्म होकर पूरे चैम्बर में ड्राई हीट पैदा करती हैं। ओटीजी का उपयोग मुख्य रूप से बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग जैसे कामों के लिए किया जाता है। हालांकि इसकी यही तकनीक गर्मियों में परेशानी भी बढ़ा सकती है। ओटीजी को इस्तेमाल करने से पहले सामान्य तौर पर 10 से 15 मिनट तक प्रीहीट करना पड़ता है। इसके बाद खाना पकाने में 20 से 45 मिनट या उससे ज्यादा समय लग सकता है।

ओटीजी लंबे समय तक 150 से 250 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान बनाए रखता है। इसके कारण केवल अंदर का चैम्बर ही नहीं बल्कि इसकी मेटल बॉडी, ग्लास डोर और आसपास की हवा भी धीरे-धीरे गर्म होने लगती है। यदि लंबे समय तक केक, कुकीज या ग्रिल्ड फूड तैयार किया जाए तो किचन कुछ ही समय में काफी गर्म महसूस होने लगता है। यही वजह है कि भीषण गर्मी में ओटीजी का लगातार उपयोग कई लोगों के लिए असहज अनुभव बन सकता है।

माइक्रोवेव और ओटीजी के बीच सबसे बड़ा अंतर केवल तकनीक का नहीं बल्कि कुकिंग टाइम का भी है। माइक्रोवेव कम समय में तेजी से काम पूरा करता है, जबकि ओटीजी को लंबे समय तक लगातार गर्म रहना पड़ता है। यही कारण है कि गर्मियों में माइक्रोवेव को ज्यादा सुविधाजनक और आरामदायक विकल्प माना जाता है।

बिजली की खपत के मामले में भी दोनों के बीच अंतर देखने को मिलता है। कई लोग केवल वॉटेज देखकर फैसला करते हैं, लेकिन असल में बिजली का बिल इस बात पर निर्भर करता है कि उपकरण कितनी देर तक चलता है। माइक्रोवेव सामान्य तौर पर 1200 से 1400 वॉट तक बिजली इस्तेमाल करता है, लेकिन इसका उपयोग कम समय के लिए होता है। दूसरी तरफ ओटीजी कई बार कम वॉटेज का होता है, लेकिन यह 30 से 60 मिनट तक लगातार चलता रहता है। ऐसे में कुल बिजली खपत बढ़ सकती है।

इसके अलावा ओटीजी से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी का असर घर के कूलिंग सिस्टम पर भी पड़ता है। गर्म किचन को ठंडा रखने के लिए एसी या कूलर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे बिजली का बिल और बढ़ सकता है। वहीं माइक्रोवेव कम गर्मी पैदा करता है, इसलिए घर का तापमान अपेक्षाकृत संतुलित बना रहता है।

हालांकि माइक्रोवेव हर मामले में ओटीजी की जगह नहीं ले सकता। ओटीजी की सबसे बड़ी ताकत उसका फूड टेक्सचर है। माइक्रोवेव खाना जल्दी गर्म तो कर देता है, लेकिन कई बार खाने का टेक्सचर नरम या थोड़ा रबर जैसा महसूस हो सकता है। इसके विपरीत ओटीजी ड्राई हीट की मदद से खाने को क्रिस्पी और गोल्डन ब्राउन बनाता है। यही कारण है कि बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग के लिए आज भी ओटीजी को ज्यादा बेहतर माना जाता है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो गर्मियों में रोजमर्रा के हल्के और तेज कामों के लिए माइक्रोवेव ज्यादा सुविधाजनक, एनर्जी एफिशिएंट और कम गर्मी पैदा करने वाला विकल्प साबित होता है। वहीं यदि किसी को केक, पिज्जा, कुकीज या ग्रिल्ड फूड जैसे विशेष व्यंजन बनाने हों, तो ओटीजी अब भी जरूरी उपकरण बना हुआ है। सही चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि उपयोगकर्ता की जरूरत क्या है और वह किस प्रकार की कुकिंग ज्यादा करता है।

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