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पाक पत्रकार अजीम चौधरी का बड़ा बयान: अमेरिका पर निर्भर है पाकिस्तान

पाक पत्रकार अजीम चौधरी का बड़ा बयान: अमेरिका पर निर्भर है पाकिस्तान

पाकिस्तान की आंतरिक और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जब वरिष्ठ पत्रकार अजीम चौधरी ने देश के शासन तंत्र और उसकी वैश्विक छवि पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने खुलकर कहा कि पाकिस्तान की पहचान एक ऐसे देश के रूप में बन गई है, जो अमेरिका के प्रभाव में काम करता है और उसकी नीतियों से प्रभावित रहता है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम वार्ता को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं।

अजीम चौधरी ने यह बयान एक चर्चा के दौरान दिया, जिसमें वे पाकिस्तानी टिप्पणीकार कमर चीमा के साथ बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत में उन्होंने पाकिस्तान की राजनीतिक नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की लीडरशिप का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई खास प्रभाव या कद नहीं है। उनके अनुसार, जब कोई देश आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर होता है और सहायता के आधार पर अपनी नीतियां तय करता है, तो उसकी स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।

चौधरी ने अपने बयान में यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अपने अस्तित्व के शुरुआती वर्षों में ही खुद को बाहरी शक्तियों के प्रभाव में डाल दिया था। उनका दावा था कि देश के निर्माण के तुरंत बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की ओर रुख किया और इसी दौरान अमेरिका ने आर्थिक और खाद्य सहायता के जरिए यहां अपनी मजबूत पकड़ बना ली। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा दी गई मदद ने पाकिस्तान को एक तरह से उसका “शुक्रगुजार” बना दिया, जिससे देश की नीतियों और सरकारों पर उसका प्रभाव बढ़ता गया।

उनके अनुसार, पाकिस्तान में सरकारों का गठन भी काफी हद तक अमेरिकी प्रभाव से जुड़ा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बिना अमेरिका की सहमति के यहां कोई सरकार बनना मुश्किल है। उन्होंने मौजूदा सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि शहबाज शरीफ की सरकार भी अमेरिकी समर्थन से बनी और चल रही है। चौधरी ने यह भी कहा कि इससे पहले की सरकारें भी इसी तरह बाहरी प्रभाव के तहत काम करती रही हैं।

अजीम चौधरी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह उस समय सामने आया है जब पाकिस्तान खुद को वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान वार्ता को पाकिस्तान अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में दिखा रहा है। हालांकि, चौधरी के बयान ने इस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं और यह संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

इस बीच, अमेरिका की ओर से जेडी वेंस के इस्लामाबाद पहुंचने की खबर ने भी इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। वे ईरान के साथ संभावित युद्धविराम समझौते पर बातचीत का नेतृत्व करने वाले हैं। वहीं, ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के भी इस वार्ता में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

चौधरी ने अपने बयान में यह भी सवाल उठाया कि पाकिस्तान को वर्षों से विभिन्न देशों से जो आर्थिक सहायता मिली है, उसका उपयोग किस तरह किया गया। उनके अनुसार, यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका स्पष्ट उत्तर आज तक सामने नहीं आया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया गया होता, तो शायद पाकिस्तान को इस तरह की निर्भरता का सामना नहीं करना पड़ता।

इस बयान के राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभावों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान न केवल देश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि पर भी असर डालते हैं। खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ और कूटनीतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, इस तरह की आलोचनाएं उसकी स्थिति को कमजोर कर सकती हैं।

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