राजस्थान में एलपीजी गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। अब बिना ई-केवाईसी (e-KYC) के किसी भी उपभोक्ता को गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा द्वारा दिए गए इस स्पष्ट निर्देश के बाद गैस वितरण व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अपात्र लोगों तक पहुंच रहे गैस लाभ को रोकना और वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक ही इसका लाभ सुनिश्चित करना है।
मंगलवार को मंत्रालय भवन में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ ऑयल एवं गैस मार्केटिंग कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस दौरान घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की गई और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में राज्य में गैस आपूर्ति की स्थिति संतोषजनक है और अधिकांश क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल रहे हैं। औसतन चार से पांच दिनों के भीतर गैस सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
ई-केवाईसी को अनिवार्य बनाने का निर्णय इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लंबे समय से यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि गैस सब्सिडी और सिलेंडर का लाभ कई बार अपात्र लोगों तक पहुंच रहा है। कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा कई कनेक्शन लिए जाने या गलत दस्तावेजों के आधार पर गैस प्राप्त करने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में सरकार का यह कदम सिस्टम में मौजूद खामियों को दूर करने और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
मंत्री Sumit Godara ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गैस एजेंसियां इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपनी ई-केवाईसी पूरी नहीं करवाई है, उन्हें जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए जागरूक किया जाए, ताकि उन्हें गैस आपूर्ति में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस निर्णय से जहां सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, वहीं फर्जी कनेक्शनों पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
बैठक के दौरान नवगठित नगरपालिकाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों को ग्रामीण श्रेणी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस बुकिंग के नियम और अंतराल अलग-अलग होते हैं। यदि इन क्षेत्रों का सही वर्गीकरण नहीं किया गया, तो उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस निर्देश के बाद उम्मीद की जा रही है कि गैस वितरण व्यवस्था में स्पष्टता आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
इसके साथ ही सरकार ने सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विवाह समारोहों में गैस सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर भी अहम निर्णय लिया है। अक्सर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े आयोजनों के दौरान गैस सिलेंडर की कमी महसूस की जाती है, जिससे लोगों को असुविधा होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह समारोह के लिए 19 किलोग्राम के दो वाणिज्यिक सिलेंडर और शहरी क्षेत्रों में तीन सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए आवेदक को विवाह का कार्ड संलग्न कर संबंधित जिला रसद अधिकारी को आवेदन देना होगा, जिसके बाद गैस एजेंसी के माध्यम से सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया। शासन सचिव Ambarish Kumar ने जानकारी दी कि प्रदेश में पाइप्ड गैस नेटवर्क को तेजी से विस्तार दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ, सुरक्षित और सुलभ ईंधन की उपलब्धता को बढ़ाना है। पाइप्ड गैस प्रणाली के विस्तार से न केवल एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम होगी, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक बेहतर विकल्प साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार के ये फैसले आने वाले समय में गैस वितरण प्रणाली को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाएंगे। ई-केवाईसी की अनिवार्यता से जहां फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा, वहीं वास्तविक उपभोक्ताओं को समय पर और बिना किसी बाधा के गैस उपलब्ध हो सकेगी। इसके अलावा PNG नेटवर्क का विस्तार और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप विशेष व्यवस्थाएं सरकार की दूरदर्शी नीति को दर्शाती हैं।


