भरतपुर जिले के पीलूपुरा में 8 अप्रैल को प्रस्तावित गुर्जर महापंचायत को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह फैसला गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। अब समिति की ओर से प्रशासन के साथ वार्ता के बाद ही महापंचायत की नई तारीख तय की जाएगी। इस घटनाक्रम के बीच रीट भर्ती 2018 के तहत 372 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन लगातार जारी है और अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं।
पीलूपुरा स्थित शहीद स्मारक पर चल रहे इस धरने को अब आठ दिन से अधिक समय हो चुका है। यहां गुर्जर समाज के युवा लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन का मुख्य मुद्दा रीट भर्ती 2018 के तहत एमबीसी वर्ग के 372 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिलाना है, जिनके लिए पहले सरकार के साथ समझौते भी हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें नौकरी नहीं मिल सकी है। इसी मुद्दे को लेकर समाज में आक्रोश बना हुआ है।
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्रीराम बैंसला ने महापंचायत स्थगित करने के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में किसान अपने खेतों में काम में व्यस्त हैं। इसके अलावा क्षेत्र में आंधी-बारिश का दौर भी जारी है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों का एकत्रित होना संभव नहीं हो पा रहा है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाज के लोगों ने सर्वसम्मति से महापंचायत को टालने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महापंचायत भले ही स्थगित कर दी गई हो, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। पीलूपुरा के शहीद स्थल पर धरना पहले की तरह जारी रहेगा और अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे। बैंसला ने कहा कि सरकार चाहे तो इन युवाओं को तुरंत नौकरी दे सकती है, इसमें किसी प्रकार की बाधा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इन अभ्यर्थियों को पिछले सात वर्षों से भटकना पड़ रहा है और अब उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता की स्थिति बन गई है।
आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी आसपास के गांवों से लोग लगातार पीलूपुरा पहुंच रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि समाज इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और अपने युवाओं के भविष्य को लेकर एकजुट है। बैंसला ने बताया कि प्रशासन से बातचीत के लिए समिति पूरी तरह तैयार है और कल कलेक्टर से वार्ता प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि समिति की कोई जिद नहीं है कि महापंचायत ही हो, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार दिलाना है।
गुर्जर समाज की अन्य लंबित मांगों का भी इस आंदोलन में जिक्र हो रहा है। बैंसला के अनुसार देवनारायण योजना के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी नहीं की गई है और गुरुकुल के लिए निर्धारित 50 हजार रुपए की सहायता भी अब तक नहीं बढ़ाई गई है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों पर भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। समाज की मांग है कि उन्हें 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि आरक्षण को कानूनी सुरक्षा मिल सके, लेकिन यह मुद्दा भी अब तक अधूरा है।
महापंचायत स्थगित करने के पीछे स्थानीय परिस्थितियां भी एक अहम कारण रही हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में मौसम खराब रहा है, जिसमें आंधी, बारिश और ओलावृष्टि शामिल है। इससे किसानों का काम प्रभावित हुआ है और वे अपने खेतों में व्यस्त हैं। इसके अलावा पास के गांव महरावर से एक फौजी के असम से लापता होने की घटना ने भी समाज को चिंतित किया है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सामूहिक निर्णय लिया गया कि फिलहाल महापंचायत को टाल दिया जाए।
हालांकि, समाज ने यह भी तय किया है कि जब तक महापंचायत की नई तारीख घोषित नहीं होती, तब तक गांव-गांव जाकर छोटी-छोटी पंचायतें आयोजित की जाएंगी। इसके जरिए लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा और समर्थन बढ़ाया जाएगा। यह रणनीति समाज को संगठित बनाए रखने और सरकार पर दबाव बनाए रखने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।
रीट भर्ती 2018 का मुद्दा लंबे समय से विवाद का कारण बना हुआ है। वर्ष 2018 में जब यह भर्ती निकली थी, उस समय एमबीसी वर्ग को केवल 1 प्रतिशत आरक्षण मिलता था। बाद में 2019 में हुए आंदोलन के बाद गुर्जर समाज के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण की मांग उठी और सरकार के साथ कई दौर की वार्ताएं हुईं। फरवरी 2019, अक्टूबर 2020 और दिसंबर 2022 में हुए समझौतों में यह तय किया गया था कि एमबीसी वर्ग के 372 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाएगी और यह प्रक्रिया सात दिनों के भीतर पूरी की जाएगी। लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं हो पाया है, जिससे समाज में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।


