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कन्हैया लाल केस में देरी पर सवाल, परिवार ने उठाई स्पेशल कोर्ट की मांग

कन्हैया लाल केस में देरी पर सवाल, परिवार ने उठाई स्पेशल कोर्ट की मांग

राजस्थान के उदयपुर में वर्ष 2022 में हुए बहुचर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। इस मामले में ट्रायल की धीमी गति और अब तक स्पेशल कोर्ट का गठन नहीं होने को लेकर पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कन्हैया लाल के बेटे यश साहू ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए न्याय प्रक्रिया में हो रही देरी को सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना दिया है।

परिवार की ओर से उठाए गए सवालों ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को सुर्खियों में ला दिया है। यश साहू ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस पुराने बयान को सोशल मीडिया पर साझा किया, जो उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दिया था। उस समय अमित शाह ने कहा था कि यदि तत्कालीन सरकार स्पेशल कोर्ट का गठन कर देती, तो अब तक आरोपियों को सजा मिल चुकी होती। अब परिवार ने इसी बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि जब केंद्र और राज्य दोनों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, तो ढाई साल बीत जाने के बावजूद स्पेशल कोर्ट का गठन क्यों नहीं किया गया।

कन्हैया लाल के परिवार का कहना है कि न्याय में हो रही देरी उनके लिए मानसिक पीड़ा का कारण बन रही है। उन्होंने भावुक अपील करते हुए पूछा है कि आखिर कब उन्हें न्याय मिलेगा और कब दोषियों को सजा दी जाएगी। परिवार ने यह भी कहा कि वे अब तक कन्हैया लाल की अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पाए हैं, क्योंकि वे न्याय मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह भावनात्मक पहलू इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना देता है।

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परिवार के सवालों को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कन्हैया लाल की दुखद हत्या को लेकर सियासी लाभ लेने वाले लोग अब पीड़ित परिवार को जवाब दें कि उन्हें न्याय कब मिलेगा। गहलोत के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

वहीं, राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान लोगों को भ्रमित किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब जब सरकार उनके हाथ में है, तो वे अपने ही वादों को पूरा करने में असफल रही है। जूली ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार को पीड़ित परिवार की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है और वह केवल इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है।

कांग्रेस की ओर से भी इस मामले में भाजपा सरकार पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर होती, तो अब तक स्पेशल कोर्ट का गठन कर ट्रायल को तेज किया जा सकता था। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि न्याय में देरी पीड़ित परिवार के साथ अन्याय है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया और जटिलताओं का हवाला देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि इस मामले में न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है और सरकार न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह मामला जून 2022 में सामने आया था, जब कन्हैया लाल की हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना के बाद से ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठती रही है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई जारी रखी, लेकिन ट्रायल प्रक्रिया की गति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित न्याय के लिए विशेष अदालतों का गठन प्रभावी साबित हो सकता है। इससे न केवल ट्रायल की गति तेज होती है, बल्कि पीड़ित परिवार को भी जल्द न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती है। ऐसे में कन्हैया लाल केस में स्पेशल कोर्ट के गठन की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वर्तमान स्थिति में यह मामला केवल एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था, राजनीतिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी परीक्षण बन गया है। पीड़ित परिवार की पीड़ा और उनके सवालों ने सरकार और राजनीतिक दलों दोनों के सामने जवाबदेही की चुनौती खड़ी कर दी है।

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