राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो व्यापारियों से कुल 1 करोड़ 40 लाख रुपये की फिरौती मांगने के आरोप में एक शिक्षक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि आरोपी कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाला शिक्षक है, जिसने आर्थिक दबाव और कर्ज के चलते इस गंभीर साजिश को अंजाम देने की कोशिश की।
इस पूरे प्रकरण का खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी ने बताया कि आरोपी की पहचान विकेश कुमार कमोल के रूप में हुई है, जो कुशलगढ़ थाना क्षेत्र के गांव टिम्बा महुडी का निवासी है और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चुडादा में द्वितीय श्रेणी गणित विषय का अध्यापक है। आरोपी ने बेहद सुनियोजित तरीके से दो अलग-अलग व्यापारियों को निशाना बनाकर उनसे भारी रकम की मांग की थी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 30 मार्च को एक व्यापारी की बंद दुकान के शटर के नीचे से एक धमकी भरा पत्र डाल दिया, जबकि दूसरे व्यापारी के फार्महाउस पर जाकर वहां के कर्मचारी को एक लिफाफा थमा दिया। उसने कर्मचारी से कहा कि यह जमीन से संबंधित कागजात हैं और इसे मालिक तक पहुंचा दिया जाए। बाद में जब पत्र खोला गया, तो उसमें खुद को बड़ा गैंगस्टर बताते हुए एक व्यापारी से 90 लाख और दूसरे से 50 लाख रुपये की मांग की गई थी। साथ ही, पैसे नहीं देने की स्थिति में परिवार और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई थी।
इन धमकी भरे पत्रों से घबराए दोनों व्यापारियों ने 31 मार्च को पुलिस को इसकी सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया और जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरपत सिंह के निर्देशन में और पुलिस उपाधीक्षक गोपीचंद मीणा के नेतृत्व में थाना राजतलाब में अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और पारंपरिक दोनों तरीकों का सहारा लिया। करीब 300 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिससे आरोपी की गतिविधियों का सुराग मिला। पुलिस टीम ने दाहोद मार्ग पर आरोपी के आने-जाने के रास्तों का बारीकी से विश्लेषण किया। इसके साथ ही, फिरौती पत्र में इस्तेमाल किए गए लिफाफों के स्रोत का पता लगाने के लिए रास्ते में पड़ने वाली स्टेशनरी दुकानों पर भी पूछताछ की गई।
लगातार जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में सफलता मिली। जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, तो उसने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग की लत का शिकार हो गया था और इस कारण उसने लाखों रुपये गंवा दिए थे। धीरे-धीरे वह भारी कर्ज में डूब गया और लेनदारों का दबाव बढ़ने लगा। इसी दबाव से बचने और कर्ज चुकाने के लिए उसने यह पूरी साजिश रची।
आरोपी ने पहले संभावित शिकार की तलाश की। वह बांसवाड़ा के एक फार्महाउस पर पहुंचा और वहां चौकीदार से गाय खरीदने का बहाना बनाकर मालिक के बारे में जानकारी जुटाई। उसे पता चला कि फार्महाउस का मालिक सोना-चांदी का व्यापारी और प्रॉपर्टी डीलर है। इसी तरह उसने दूसरे व्यापारी की भी जानकारी एकत्र की और उन्हें निशाना बनाया।
फिरौती की रकम वसूलने के लिए आरोपी ने भोयन घाटी की पहाड़ियों और पानी की टंकी रोड जैसे सुनसान स्थानों को चुना, ताकि वह बिना किसी बाधा के रकम लेकर फरार हो सके। हालांकि पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते उसके मंसूबे सफल नहीं हो सके और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली है।
इस पूरे मामले में पुलिस टीम की सक्रियता और समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आरपीएस प्रशिक्षु सुहासी जैन, पुलिस निरीक्षक देवीलाल मीणा, थानाधिकारी बुधाराम विश्नोई, सहायक उपनिरीक्षक महेंद्र सिंह और साइबर शाखा के अधिकारियों ने मिलकर इस मामले का पर्दाफाश किया।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है कि किस तरह ऑनलाइन गेमिंग और कर्ज का दबाव एक व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। एक शिक्षक, जो समाज में ज्ञान और नैतिकता का प्रतीक माना जाता है, उसका इस तरह के अपराध में शामिल होना कई सवाल खड़े करता है।


