राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल तब तेज हो गई जब पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया शुक्रवार को उदयपुर पहुंचे। उनके इस दौरे को केवल एक औपचारिक यात्रा के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर भी समझा जा रहा है। डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पर जिस तरह उनका स्वागत किया गया, उसने राजनीतिक हलकों में कई संकेत दिए हैं।
कटारिया दोपहर करीब 12:10 बजे एयरपोर्ट पहुंचे, जहां पहले से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। जैसे ही वे बाहर आए, कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया और जोरदार नारों के साथ उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट के एग्जिट गेट से लेकर मुख्य सड़क तक स्वागत की भव्य तैयारियां की गई थीं। ढोल-नगाड़ों की गूंज और कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण मौजूदगी ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया।
इस स्वागत कार्यक्रम का नेतृत्व शहर विधायक ताराचंद जैन ने किया, जिन्होंने पिछले दो दिनों से इसे ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां की थीं। केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं को इस आयोजन में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। दर्जनों वाहनों की रैली के रूप में कार्यकर्ता एयरपोर्ट से शहर की ओर निकले, जिससे यह आयोजन एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गया।
एयरपोर्ट पर मौजूद नेताओं की सूची भी काफी लंबी रही। गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, पूर्व महापौर जीएस टांक और गीता पटेल समेत कई प्रमुख चेहरे इस स्वागत में शामिल हुए। इसके अलावा देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली, पूर्व देहात जिलाध्यक्ष चन्द्रगुप्त सिंह चौहान और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अतुल चंडालिया भी मौजूद रहे।
हालांकि इस भव्य आयोजन के बीच एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि शहर भाजपा कार्यकारिणी से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी इस स्वागत में नजर नहीं आए। वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर, शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह और पारस सिंघवी जैसे प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी। इससे यह संकेत मिला कि संगठन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और कुछ स्तर पर असहमति या दूरी मौजूद है।
कटारिया के स्वागत को केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक ‘मूक शक्ति प्रदर्शन’ के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस आयोजन के पीछे शहर जिलाध्यक्ष पद की दौड़ एक बड़ा कारण है। भाजपा के 8 से 10 संभावित दावेदार इस मौके पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अपनी ताकत दिखाने पहुंचे थे। यह स्पष्ट है कि यह आयोजन केवल स्वागत तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके जरिए संगठन के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास भी किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही गुलाबचंद कटारिया वर्तमान में राज्यपाल के संवैधानिक पद पर हैं, लेकिन उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है। ऐसे में उनके सामने अपनी ताकत दिखाना और उनका समर्थन प्राप्त करना स्थानीय नेताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे हाल ही में सामने आए कथित ‘वीडियोकांड’ की भी बड़ी भूमिका बताई जा रही है। इस मामले ने भाजपा संगठन के भीतर पहले से मौजूद हल्की दरार को और गहरा कर दिया है। एक महिला भाजपा नेता द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे ने संगठन की छवि पर सवाल खड़े किए हैं और पार्टी के भीतर दो स्पष्ट गुटों को उजागर कर दिया है।
पहला गुट वर्तमान पदाधिकारियों का है, जो इस पूरे विवाद को राजनीतिक साजिश करार देते हुए खुद को निर्दोष बता रहे हैं। वहीं दूसरा गुट उन नेताओं का है, जो संगठन में पारदर्शिता और शुचिता की बात करते हुए वर्तमान नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इस प्रकार, पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
कटारिया के इस दौरे ने इन दोनों गुटों के बीच की प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। जो नेता इस स्वागत में सक्रिय रूप से शामिल हुए, वे इसे अपने समर्थन और प्रभाव का प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि अनुपस्थित रहने वाले नेताओं की चुप्पी भी अपने आप में कई संकेत दे रही है।
एयरपोर्ट से स्वागत के बाद कटारिया कैलाशपुरी के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने एक कार्यक्रम में भाग लिया। हालांकि, राजनीतिक दृष्टि से उनका यह दौरा केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने उदयपुर भाजपा की आंतरिक राजनीति को उजागर कर दिया।


