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अजमेर में आधी सड़क चमकी, आधी जर्जर: विकास पर उठे सवाल

अजमेर में आधी सड़क चमकी, आधी जर्जर: विकास पर उठे सवाल

राजस्थान के अजमेर में एक ही सड़क के दो अलग-अलग हिस्सों में विकास का असमान स्तर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मामला केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सड़कों का भी वोटर लिस्ट में नाम होता, तो शायद उनका विकास भी समान रूप से हो पाता।

दरअसल, शहर के मुख्य बस स्टैंड से कुंदन नगर स्थित सीआरपीएफ ब्रिज तक करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह से विकसित और चमचमाता हुआ नजर आता है, जबकि दूसरा हिस्सा गड्ढों, धूल और टूट-फूट से भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि यह दोनों हिस्से एक ही सड़क के हैं, लेकिन अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में आने के कारण इनके विकास में भारी अंतर देखने को मिल रहा है।

इस सड़क का बायां हिस्सा वासुदेव देवनानी के अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आता है, जबकि दायां हिस्सा अनीता भदेल के अजमेर दक्षिण क्षेत्र में आता है। जानकारी के अनुसार, अजमेर उत्तर क्षेत्र के लिए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अनुशंसा पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने सड़क के एक हिस्से का पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान पुरानी सड़क को उखाड़कर नई डामर सड़क बनाई गई और उस पर व्हाइट लाइनिंग भी की गई, जिससे वह हिस्सा पूरी तरह से आधुनिक और सुगम दिखाई देता है।

इस निर्माण कार्य पर लगभग 1.36 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह राशि मूल रूप से अजमेर उत्तर क्षेत्र की दो सड़कों के लिए स्वीकृत की गई थी, लेकिन बाद में उसे संशोधित कर इस एक सड़क के निर्माण में उपयोग किया गया। दूसरी ओर, अजमेर दक्षिण क्षेत्र के हिस्से के लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण वहां सड़क का निर्माण नहीं हो सका, जिससे यह हिस्सा जर्जर स्थिति में ही बना रहा।

इस असमान विकास का सीधा असर उन हजारों लोगों पर पड़ रहा है, जो प्रतिदिन इस सड़क का उपयोग करते हैं। अनुमान के अनुसार, करीब 50 हजार लोग रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं। यह सड़क न केवल अजमेर उत्तर और दक्षिण को जोड़ती है, बल्कि ब्यावर और नसीराबाद जैसे क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में सड़क का एक हिस्सा बेहतर और दूसरा हिस्सा खराब होना यातायात और सुरक्षा दोनों के लिहाज से गंभीर समस्या बन गया है।

सड़क के दोनों हिस्सों में निर्माण के अंतर के कारण अब यह ऊंचाई और गुणवत्ता में भी अलग-अलग हो गई है। जहां एक ओर नई सड़क समतल और मजबूत है, वहीं दूसरी ओर पुरानी सड़क गड्ढों से भरी और असमान है। इससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर सीआरपीएफ ब्रिज के पास स्थिति और भी खतरनाक हो गई है, जहां सड़क और डिवाइडर का स्तर लगभग एक जैसा हो गया है। इससे वाहनों के फिसलकर दूसरी लेन में जाने का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सड़क पर लगे डिवाइडर टूट चुके हैं और स्ट्रीट लाइटें भी काम नहीं कर रही हैं, जिससे रात के समय दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। इस स्थिति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे मामले पर अजमेर दक्षिण की विधायक अनीता भदेल ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर विवाद नहीं करना चाहतीं, लेकिन यह तथ्य है कि सड़क एक ही है और उसका विकास समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि जब उनके विधायक कोटे से केसरगंज क्षेत्र में सड़क बनाई गई थी, तब दोनों ओर के हिस्सों को शामिल किया गया था। वर्तमान स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि यह संबंधित विभाग और योजना बनाने वालों की सोच को दर्शाता है।

इस बीच, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने भी स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार, सड़क का बायां हिस्सा अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आता है, जिसके लिए बजट स्वीकृत था और निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। वहीं दायां हिस्सा अजमेर दक्षिण क्षेत्र में आता है, जिसके लिए किसी योजना में स्वीकृति नहीं मिली थी। हालांकि, अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया है कि वर्ष 2026-27 के बजट में इस हिस्से के निर्माण को शामिल किया गया है और जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अजमेर दक्षिण से कांग्रेस प्रत्याशी रहीं द्रौपदी कोली ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है और दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भी एक ही दल के विधायक हैं, तो इस तरह का भेदभाव समझ से परे है। उन्होंने कहा कि सड़कों को उत्तर और दक्षिण के आधार पर बांटना पूरी तरह गलत है और विकास कार्यों में समानता होनी चाहिए।

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