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SI भर्ती-2025: सुप्रीम कोर्ट ने ओवरएज अभ्यर्थियों को राहत सीमित की

SI भर्ती-2025: सुप्रीम कोर्ट ने ओवरएज अभ्यर्थियों को राहत सीमित की

राजस्थान में बहुचर्चित SI भर्ती-2025 परीक्षा से ठीक दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को बड़ी राहत प्रदान की है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष अवकाश पीठ, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे, ने अपने एक दिन पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए ओवरएज अभ्यर्थियों को दी गई राहत के दायरे को सीमित कर दिया। इस फैसले ने लाखों अभ्यर्थियों की उम्मीदों को प्रभावित किया है और भर्ती प्रक्रिया को लेकर नया मोड़ ला दिया है।

दरअसल, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में यह कहा था कि SI भर्ती-2021 में शामिल हुए सभी अभ्यर्थियों को SI भर्ती-2025 की परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए। यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए राहत लेकर आया था जो आयु सीमा पार कर चुके थे और 2025 की भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पाए थे। अनुमानित रूप से ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 2.21 लाख थी, जो इस निर्णय से सीधे लाभान्वित हो सकते थे।

हालांकि, अगले ही दिन इस आदेश में संशोधन करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल याचिकाकर्ता सूरजमल मीणा तक ही सीमित रहेगी। कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति दूसरे के लिए राहत की मांग नहीं कर सकता है और यह आदेश केवल उन्हीं पर लागू होगा जिन्होंने स्वयं न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सभी ओवरएज अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस फैसले से उन लाखों उम्मीदवारों को झटका लगा है जो पहले के आदेश के आधार पर परीक्षा में बैठने की उम्मीद कर रहे थे। विशेष रूप से वे अभ्यर्थी जो SI भर्ती-2021 में शामिल हुए थे, लेकिन 2025 की भर्ती में आयु सीमा के कारण आवेदन नहीं कर पाए थे, अब इस संशोधित आदेश के चलते बाहर हो गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के पीछे आरपीएससी द्वारा दायर की गई याचिका का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोग की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इतने कम समय में लगभग 2.21 लाख नए अभ्यर्थियों से आवेदन मंगवाना, उनके एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्था करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा की सभी तैयारियां पहले ही पूरी की जा चुकी हैं और 7.5 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

आरपीएससी ने अपनी याचिका में यह भी तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले का आदेश आयोग की बात सुने बिना पारित किया था, जिससे प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती थीं। इस आधार पर आयोग ने अदालत से अनुरोध किया था कि आदेश को संशोधित करते हुए केवल याचिकाकर्ताओं तक ही सीमित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए अपने आदेश में बदलाव किया।

इस पूरे विवाद की जड़ SI भर्ती-2021 से जुड़ी हुई है, जिसे राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को पेपर लीक और गंभीर अनियमितताओं के चलते रद्द कर दिया था। उस समय कोर्ट ने यह भी सिफारिश की थी कि इस भर्ती में शामिल रहे अभ्यर्थियों को भविष्य की भर्तियों में आयु सीमा में छूट दी जाए। हालांकि, इस फैसले पर 8 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रोक लगा दी थी, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।

इसके बाद आरपीएससी ने नई भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में कोई विशेष छूट नहीं दी, जिसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने पुनः न्यायालय का रुख किया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और वहां से इसे वापस हाईकोर्ट भेजा गया। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 19 जनवरी 2026 को इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन ढाई महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं आया है।

इस बीच, SI भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा 5 और 6 अप्रैल 2026 को दो चरणों में आयोजित की जानी है। परीक्षा को लेकर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह संशोधित आदेश भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी बड़े व्यवधान के आगे बढ़ाने में सहायक माना जा रहा है।

हालांकि, इस निर्णय ने अभ्यर्थियों के बीच असंतोष भी पैदा किया है, खासकर उन उम्मीदवारों में जो आयु सीमा पार कर चुके हैं और न्यायिक प्रक्रिया के कारण राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब उनकी नजरें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो भविष्य में उनकी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से संतुलित माना जा रहा है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की उम्मीदों को झटका लगा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या अंतिम निर्णय देता है और क्या अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की राहत मिल पाती है या नहीं।

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