राजस्थानlatest-newsअजमेरदेश

अजमेर में शिया मुस्लिम समुदाय ने सादगी से मनाई गई ईद

अजमेर में शिया मुस्लिम समुदाय ने सादगी से मनाई गई ईद

राजस्थान के Ajmer में इस बार ईद उल फितर का पर्व शिया मुस्लिम समुदाय ने परंपरागत उत्साह के बजाय सादगी और गमगीन माहौल में मनाया। समुदाय के लोगों ने काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की और सामान्यतः होने वाले उत्सवों से दूरी बनाए रखी। न तो नए कपड़े पहने गए और न ही घरों में खुशियों का माहौल नजर आया। इस निर्णय के पीछे धार्मिक और वैश्विक परिस्थितियों के प्रति संवेदना जताने की भावना प्रमुख रही।

बताया गया कि यह कदम Ayatollah Seyyed Ali Khamenei के निधन पर शोक व्यक्त करने के तौर पर उठाया गया। समुदाय के लोगों में इस घटना को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया और आक्रोश भी देखने को मिला, वहीं कुछ लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर विरोध भी जताया।

नमाज के दौरान अमन और शांति के लिए दुआ

ईद की नमाज मौलाना सैय्यद तकी जाफर की अगुवाई में अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान मौलाना सैय्यद शमीमुल हसन और मौलाना हैदर बिजनौरी सहित कई धार्मिक विद्वान भी मौजूद रहे। नमाज के दौरान विशेष रूप से दुनिया में चल रहे तनाव, युद्ध और संघर्ष की स्थितियों को समाप्त करने के लिए दुआ की गई।

समुदाय के लोगों ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस बार ईद को सादगी से मनाना ही उचित समझा गया, ताकि शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा सके। पूरे कार्यक्रम के दौरान गमगीन माहौल बना रहा, लेकिन इसके साथ ही लोगों ने एकजुट होकर शांति और सद्भाव की अपील भी की।

शांति और भाईचारे का दिया संदेश

ईद के अवसर पर Ajmer Sharif Dargah से जुड़े परिवार के सदस्य नसरुद्दीन चिश्ती ने भी शहरवासियों को शांति और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने सरकारी ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वैश्विक हालात पर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के कई देश आपसी संघर्ष और युद्ध की स्थिति में उलझे हुए हैं, जिससे वैश्विक शांति प्रभावित हो रही है। ऐसे माहौल में उन्होंने भारत को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण देश बताया, जहां विभिन्न धर्मों के लोग आपसी सद्भाव के साथ अपने-अपने त्योहार मना रहे हैं।

वैश्विक शांति के लिए विशेष प्रार्थना

नसरुद्दीन चिश्ती ने बताया कि ईद की नमाज के दौरान विशेष रूप से उन देशों के लिए दुआ की गई, जहां युद्ध और हिंसा की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह प्रार्थना की गई कि वहां जल्द से जल्द अमन-चैन स्थापित हो और निर्दोष लोगों को राहत मिले।

उन्होंने इंसानियत के नाते हर व्यक्ति से शांति की कामना करने की अपील की। साथ ही समाज में भाईचारे और सद्भाव को बनाए रखने पर जोर दिया। उनके अनुसार ईद जैसे पर्व केवल खुशियां मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि यह हमें एकता, प्रेम और इंसानियत का संदेश भी देते हैं।

सामाजिक एकता का प्रतीक बना आयोजन

अजमेर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता और वैश्विक शांति की भावना को भी दर्शाता है। शिया समुदाय द्वारा सादगी से ईद मनाने का यह निर्णय वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

इस अवसर पर लोगों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, समाज में शांति, भाईचारा और इंसानियत को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading