पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर अपने पुराने विवादित बयानों पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी मोदी की जाति को लेकर टिप्पणी नहीं की थी। उनके अनुसार उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री के चरित्र को लेकर थी, न कि जाति के संदर्भ में। नौकरशाह से राजनेता बने अय्यर ने कहा कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया और इसे जातिगत टिप्पणी के रूप में प्रचारित किया गया। इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अय्यर और कांग्रेस की आलोचना की है।
‘मैंने कभी नीची जाति नहीं कहा’
जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को कभी “नीची जाति का व्यक्ति” नहीं कहा। उनके अनुसार उन्होंने केवल यह कहा था कि मोदी का व्यवहार “नीच किस्म का” है, जिसे उन्होंने चरित्र के संदर्भ में कहा था। अय्यर ने कहा कि दोनों बातों में स्पष्ट अंतर है, लेकिन उनकी टिप्पणी को जानबूझकर गलत अर्थ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद को इस तरह से पेश किया गया मानो उन्होंने किसी जाति का अपमान किया हो। उनके अनुसार यह आरोप पूरी तरह गलत है और उनके बयान का आशय अलग था।
‘मैकॉले की औलाद’ कहे जाने पर भी दी प्रतिक्रिया
अय्यर ने अपने ऊपर होने वाली आलोचनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार अंग्रेजी बोलने के कारण “मैकॉले की औलाद” कहकर संबोधित किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी तमिल भाषा जानते हैं। अय्यर ने इस टिप्पणी के जरिए भाषा और संस्कृति के मुद्दे पर भी चर्चा की।उनके अनुसार भारतीय राजनीति में कई बार व्यक्तिगत टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जाता है।
‘चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता’ बयान पर सफाई
अय्यर ने उस पुराने विवाद का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने कहा था कि “चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री नहीं बन सकता।” उन्होंने इस आरोप को भी गलत बताया। अय्यर ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा बयान नहीं दिया। उनके अनुसार इस तरह की बातों को राजनीतिक लाभ के लिए गलत तरीके से प्रचारित किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल ऐतिहासिक ज्ञान को लेकर प्रधानमंत्री की आलोचना की थी और यह सवाल उठाया था कि यदि किसी व्यक्ति को इतिहास की पर्याप्त जानकारी नहीं है तो वह उस पद की जिम्मेदारी कैसे निभा सकता है जिस पर कभी जवाहरलाल नेहरू जैसे नेता रहे हैं।
इतिहास के ज्ञान को लेकर की थी आलोचना
अय्यर ने कहा कि उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री मोदी के इतिहास संबंधी ज्ञान को लेकर की गई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए यह कहा था कि इतिहास की सही समझ किसी भी राष्ट्रीय नेता के लिए महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सिकंदर कभी पाटलिपुत्र तक नहीं पहुंचा था। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि नालंदा भारत में स्थित है जबकि तक्षशिला अब पाकिस्तान में है। अय्यर के अनुसार उन्होंने इन तथ्यों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री की आलोचना की थी और उसी संदर्भ में उन्होंने मजाक में यह भी कहा था कि यदि मोदी चुनाव हारने के बाद चाय बांटना चाहें तो उसके लिए व्यवस्था की जा सकती है।
वडनगर में चाय बेचने के दावे पर भी सवाल
अय्यर ने प्रधानमंत्री मोदी के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपने गृह नगर वडनगर के रेलवे प्लेटफार्म पर चाय बेची थी। अय्यर का दावा है कि वर्ष 1973 तक वडनगर में रेलवे प्लेटफार्म ही नहीं था। उनके अनुसार ऐसे दावे और अन्य राजनीतिक बयान लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने में सहायक रहे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक भाषणों में कई बार ऐसे दावे किए जाते हैं जो पूरी तरह तथ्यों पर आधारित नहीं होते।
भाजपा का विरोध प्रदर्शन
अय्यर के इस बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जयपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने गांधी सर्कल पर विरोध प्रदर्शन करते हुए अय्यर और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ नारे लगाए। भाजपा की राजस्थान इकाई के महामंत्री श्रवण सिंह बागड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग पूरे देश का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। बागड़ी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है, तब इस प्रकार की टिप्पणियां ओछी राजनीति को दर्शाती हैं।
भाजपा नेताओं ने मांगी माफी
भाजपा के एक अन्य प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी ने भी अय्यर के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का अपमान राष्ट्र का अपमान है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सैनी ने अय्यर से तुरंत माफी मांगने की मांग की और कांग्रेस पार्टी से भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के बयान जारी रहे तो भाजपा कार्यकर्ता पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव
अय्यर के बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर चुनावी और राजनीतिक माहौल में विवाद का कारण बनते हैं और इससे राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ता है।


