latest-newsजोधपुरराजनीतिराजस्थान

सोनम वांगचुक 170 दिन बाद रिहा

सोनम वांगचुक 170 दिन बाद रिहा

लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और नवाचारक सोनम वांगचुक को करीब 170 दिन बाद राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। उन पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम हटा लिया गया है। उनकी रिहाई के साथ ही पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। शनिवार को सुबह लगभग दस बजे उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो जोधपुर सेंट्रल जेल पहुंचीं। इसके बाद जेल प्रशासन ने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की। प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोपहर करीब सवा एक बजे सोनम वांगचुक अपनी पत्नी के साथ निजी कार में पुलिस सुरक्षा के बीच जोधपुर से रवाना हो गए।

उनकी रिहाई के बाद यह सवाल फिर उठने लगे हैं कि आखिर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसी कठोर धारा में गिरफ्तार क्यों किया गया था और अब अचानक उनकी रिहाई क्यों हुई।

एनएसए के तहत हुई थी गिरफ्तारी

सोनम वांगचुक को वर्ष 2025 में उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा की घटना सामने आई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 90 लोग घायल हो गए थे। सरकार ने आरोप लगाया था कि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को भड़काने में सोनम वांगचुक की भूमिका रही। इसके बाद 26 सितंबर 2025 को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें लद्दाख से राजस्थान लाकर जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत सरकार को यह अधिकार होता है कि यदि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा माना जाए तो उसे बिना मुकदमे के भी हिरासत में रखा जा सकता है। इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम बारह महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।

रिहाई पर सियासी प्रतिक्रिया

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी रिहाई की खबर स्वागतयोग्य है, लेकिन पूरा प्रकरण केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को कुछ महीने पहले देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताकर जेल भेजा गया था, उसे अचानक रिहा कर दिया गया। ऐसे में यह सवाल उठता है कि उनकी 170 दिनों की हिरासत का जवाब कौन देगा और आखिर उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था।

गहलोत ने यह भी कहा कि यदि किसी कानून का इस्तेमाल राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।

जेल के दौरान समर्थकों को नहीं मिली मुलाकात की अनुमति

सोनम वांगचुक के जोधपुर जेल में रहने के दौरान कई बार उनके समर्थक उनसे मिलने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अनुमति नहीं दी। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने भी उनकी रिहाई की मांग उठाई थी।

सीकर से सांसद अमराराम भी उनसे मिलने जोधपुर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी जेल प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिली। उन्होंने जेल अधीक्षक को पत्र लिखकर मुलाकात की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। इस घटना ने भी काफी चर्चा बटोरी थी और समर्थकों ने इसे अनावश्यक प्रतिबंध बताया था।

समर्थन में पहुंचे युवक को किया गया गिरफ्तार

सोनम वांगचुक को जोधपुर लाए जाने के अगले दिन एक और घटना सामने आई थी। चूरू जिले के सुजानगढ़ निवासी विजयपाल नामक युवक उनके समर्थन में तिरंगा लेकर जोधपुर सेंट्रल जेल के बाहर पहुंच गया था। वह भारत माता की जय के नारे लगाते हुए उनके समर्थन में प्रदर्शन कर रहा था। पुलिस ने उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया था।

युवक ने पुलिस को बताया था कि वह वांगचुक को देशभक्त मानता है और उनके समर्थन में अपनी भावना व्यक्त करने के लिए वहां आया था। उसने यह भी कहा था कि लद्दाख के लोग हमेशा देश के प्रति समर्पित रहे हैं और उन्होंने कई बार देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कई बार प्रदर्शन किए थे। फरवरी 2026 में कई संगठनों ने जोधपुर में उनकी रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने उस समय सेंट्रल जेल की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी थी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया था। मोहनपुरा पुलिया के पास उन्हें रोक दिया गया और आसपास के कई रास्तों को भी बंद कर दिया गया था।

जेल में भी जारी रहा उनका नवाचार

सोनम वांगचुक अपनी नवाचार क्षमता के लिए जाने जाते हैं। जेल में रहने के दौरान भी उन्होंने अपनी इसी प्रवृत्ति को जारी रखा। उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो के अनुसार उन्होंने जेल में रहते हुए यह प्रयोग किया कि गर्मियों में बैरक को किस तरह ठंडा रखा जा सकता है। उन्होंने जेल परिसर में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए इस विषय पर प्रयोग किए और जेल कर्मचारियों को भी कई उपयोगी सुझाव दिए। जेल स्टाफ ने उनसे बेहतर पेरेंटिंग और जीवन प्रबंधन से जुड़े सुझाव भी लिए।

रिहाई के बाद क्या होगा आगे

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह आगे क्या कदम उठाते हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वह लद्दाख से जुड़े पर्यावरण और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज पहले की तरह उठाते रहेंगे।

इस पूरे प्रकरण ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के उपयोग और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर भी एक नई बहस को जन्म दिया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, ताकि कानून का उपयोग न्याय और सुरक्षा के उद्देश्य से ही किया जाए। सोनम वांगचुक की रिहाई के साथ यह मामला फिलहाल एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी और लंबे समय तक चली हिरासत को लेकर उठे सवाल अभी भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading