राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को सदन में उस समय माहौल बेहद गरमा गया जब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई। महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को लेकर चल रही चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री द्वारा की गई एक विवादित टिप्पणी के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील करनी पड़ी।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब सदन में पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना की गुणवत्ता और प्रभाव पर चर्चा चल रही थी। इस दौरान वर्तमान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी कर दी, जिसे कांग्रेस नेताओं ने व्यक्तिगत हमला बताते हुए विरोध किया।
मदन दिलावर की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
विधानसभा में चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में खोले गए अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने बिना किसी ठोस योजना और तैयारी के इन स्कूलों को शुरू कर दिया था। दिलावर ने आरोप लगाया कि इन स्कूलों को खोलने के पीछे शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का उद्देश्य कम और राजनीतिक लाभ लेने की मंशा ज्यादा थी।
इसी दौरान उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली सरकार के समय बिना किसी तैयारी के अंग्रेजी स्कूल खोल दिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय ऐसे फैसले लिए गए जो शिक्षा व्यवस्था के लिए सही नहीं थे। मंत्री की इस टिप्पणी को विपक्ष ने व्यक्तिगत और अमर्यादित बताते हुए तुरंत विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
गोविंद सिंह डोटासरा का कड़ा विरोध
शिक्षा मंत्री की टिप्पणी के तुरंत बाद पूर्व शिक्षा मंत्री और कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्होंने इस बयान पर कड़ा विरोध जताया। डोटासरा ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत है बल्कि सदन की मर्यादा के भी खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि मंत्री अपने शब्द वापस लें और सदन में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने से बचें।
डोटासरा ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना पिछली सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल थी, जिसका उद्देश्य गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। उन्होंने दावा किया कि इस योजना से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को फायदा हुआ है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
टीकाराम जूली का समर्थन और पलटवार
विपक्ष के नेता टीकाराम जूली भी इस विवाद में डोटासरा के समर्थन में सामने आए। उन्होंने शिक्षा मंत्री के बयान को अमर्यादित बताते हुए कहा कि एक जिम्मेदार मंत्री से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती। जूली ने कहा कि यदि सरकार को पिछली सरकार की किसी योजना पर आपत्ति है तो वह तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर चर्चा करे, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों के जरिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सदन में बैठे मंत्री और विधायक जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें अपनी भाषा और व्यवहार में संयम रखना चाहिए। जूली ने मंत्री से आग्रह किया कि वे अपने शब्दों पर पुनर्विचार करें और सदन की गरिमा बनाए रखें।
सदन में हंगामा और स्पीकर का हस्तक्षेप
मंत्री और विपक्षी नेताओं के बीच बढ़ती तीखी बहस के कारण सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस विधायकों ने मंत्री के बयान के विरोध में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई।
स्थिति को संभालने के लिए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों से शांत रहने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। स्पीकर ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी सदस्य ने अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया है तो उन्हें कार्यवाही से हटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक चर्चा का मंच है और यहां सभी सदस्यों को एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना चाहिए। स्पीकर की अपील के बाद कुछ देर में सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।
अंग्रेजी माध्यम स्कूलों पर राजनीतिक मतभेद
महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का मुद्दा राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा उपलब्ध कराना था।
कांग्रेस का कहना है कि यह योजना सामाजिक और शैक्षिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम थी। पार्टी का दावा है कि इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला।
वहीं भाजपा सरकार का कहना है कि कई स्थानों पर इन स्कूलों को बिना पर्याप्त शिक्षकों, संसाधनों और बुनियादी ढांचे के शुरू कर दिया गया था। वर्तमान सरकार का तर्क है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है और इसके लिए सभी योजनाओं की समीक्षा जरूरी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवाद
विधानसभा के भीतर हुई इस तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना केवल नीतिगत मतभेद तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गई।


