घर में नया पेंट करवाने के बाद दीवारों की चमक और ताजगी पूरे माहौल को बदल देती है। साफ-सुथरी दीवारें और नया रंग घर को आकर्षक बनाते हैं, लेकिन अक्सर पेंटिंग के बाद कुछ दिनों तक कमरे में तेज केमिकल जैसी गंध बनी रहती है। कई लोगों को इस दौरान खांसी, गले में खराश या घुटन जैसी समस्या महसूस होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका मुख्य कारण पेंट में मौजूद कुछ रासायनिक तत्व होते हैं, जिन्हें वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स यानी वीओसी कहा जाता है।
वीओसी क्या होते हैं और कैसे करते हैं असर
पेंट, वार्निश, थिनर और चिपकाने वाले पदार्थों में फॉर्मल्डिहाइड, बेंजीन और टोल्यून जैसे वीओसी पाए जाते हैं। ये रसायन धीरे-धीरे हवा में घुलते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यूनाइटेड स्टेट एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एजेंसी के अनुसार, पेंटिंग या घर की मरम्मत जैसे कामों के दौरान घर के अंदर वीओसी का स्तर बाहरी वातावरण की तुलना में कई गुना अधिक हो सकता है।
जब ये रसायन सांस के जरिए शरीर में पहुंचते हैं तो वे श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इससे सांस लेने में परेशानी, खांसी, गले में जलन और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं होने लगती हैं। खासकर जिन घरों में वेंटिलेशन ठीक नहीं होता, वहां यह समस्या अधिक देखी जाती है क्योंकि रसायन कमरे के अंदर ही फंसे रहते हैं।
श्वसन तंत्र पर पड़ने वाला प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार वीओसी श्वसन नलियों में सूजन पैदा कर सकते हैं और म्यूकस यानी बलगम के निर्माण को बढ़ा सकते हैं। इससे ब्रॉन्कियल ट्यूब्स संकरी हो जाती हैं और व्यक्ति को लगातार सूखी खांसी, घरघराहट और हल्की सांस फूलने की शिकायत हो सकती है। सामान्य तौर पर स्वस्थ वयस्कों में ये लक्षण कुछ दिनों बाद कम हो जाते हैं, लेकिन यदि लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहा जाए तो श्वसन तंत्र अधिक संवेदनशील हो सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों, धूम्रपान करने वालों और अस्थमा के मरीजों के लिए यह जोखिम और भी अधिक होता है। लगातार संपर्क में रहने से श्वसन नलियों में स्थायी सूजन की स्थिति बन सकती है, जो आगे चलकर क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या अन्य श्वसन रोगों का कारण बन सकती है।
कब जरूरी हो जाती है डॉक्टर से जांच
यदि घर में पेंटिंग करवाने के बाद तीन से चार सप्ताह तक खांसी या सांस से जुड़ी समस्या बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस स्थिति में फेफड़ों की जांच करवाना जरूरी हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लंग फंक्शन टेस्ट के जरिए फेफड़ों की कार्यक्षमता का आकलन किया जा सकता है और शुरुआती चरण में ही संभावित समस्याओं का पता लगाया जा सकता है।
वेंटिलेशन का महत्व
खराब वेंटिलेशन इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। यदि पेंटिंग के दौरान खिड़कियां बंद रखी जाएं और केवल एयर कंडीशनर पर निर्भर रहा जाए, तो वीओसी कमरे के अंदर ही जमा हो जाते हैं। ऐसे में क्रॉस वेंटिलेशन यानी एक से अधिक खिड़कियां खोलकर हवा का आवागमन बनाए रखना जरूरी होता है। इससे रसायनों की गंध और उनका प्रभाव जल्दी कम हो सकता है।
कैसे करें बचाव
पेंटिंग करवाते समय कुछ सावधानियां अपनाकर इन समस्याओं से बचा जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जहां संभव हो वहां लो वीओसी या नो वीओसी पेंट का इस्तेमाल करना चाहिए। पेंटिंग के दौरान और उसके बाद कम से कम 48 से 72 घंटे तक कमरे को अच्छी तरह खुला रखना जरूरी होता है ताकि हवा का प्रवाह बना रहे।
इसके अलावा पेंटिंग के दौरान मास्क पहनना भी फायदेमंद माना जाता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा से पीड़ित लोगों को पेंटिंग वाले कमरे से कुछ दिनों तक दूर रखना बेहतर रहता है। घर की सुंदरता के लिए पेंटिंग जरूरी हो सकती है, लेकिन इसके साथ-साथ घर के सदस्यों की सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


