राजस्थान में पेयजल और सिंचाई के लिए चल रही दो बड़ी परियोजनाएँ—नौनेरा वृहद पेयजल परियोजना और परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना—तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इन परियोजनाओं के तहत पहाड़ को चीरकर देश की सबसे बड़ी वाटर टनल बनाई जा रही है, जिसका निर्माण अब अंतिम चरण में पहुँच गया है। यह टनल क्षेत्र के हजारों गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों की भूमि को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा भी प्रदान करेगी।
नौनेरा वृहद पेयजल परियोजना
जल जीवन मिशन के अंतर्गत 1661.14 करोड़ रुपये की नौनेरा परियोजना का उद्देश्य कोटा (Kota) और बूंदी (Bundi) जिलों के कुल 749 गांवों और छह कस्बों के 1,13,287 परिवारों को हर घर जल उपलब्ध कराना है। परियोजना को चार कार्यकारी पैकेजों में बांटा गया है, जिनके कार्यादेश 4 दिसंबर 2025 को जारी किए गए।
पहले पैकेज के 207.38 करोड़ रुपये से कोटा, पीपलदा और सांगोद के गांवों के साथ-साथ बूंदी जिले के केशवरायपाटन क्षेत्र को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। दूसरे पैकेज में 200.52 करोड़ की लागत से पीपलदा ब्लॉक के 165 गांवों और एक कस्बे को लाभ पहुंचाया जाएगा। तीसरे पैकेज के 264.96 करोड़ रुपये से लाडपुरा, पीपलदा और सांगोद क्षेत्रों के कुल 219 गांवों और दो कस्बों को जोड़ा जाएगा। चौथे पैकेज के तहत 476.50 करोड़ की लागत से शेष क्षेत्रों में पाइपलाइन और जल संरचना से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं।
परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना
3523.16 करोड़ रुपये की परवन-अकावद परियोजना का उद्देश्य Baran district, Kota और Jhalawar के 1402 गांवों और 276 ढाणियों के 1,52,437 परिवारों को हर घर जल उपलब्ध कराना है। परियोजना को पांच पैकेजों में विभाजित किया गया है और कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस परियोजना के अंतर्गत अकावद बांध पर बनाई जा रही देश की सबसे बड़ी वाटर टनल विशेष आकर्षण का केंद्र है। पहाड़ को काटकर निर्मित यह विशाल टनल बारां जिले के किसानों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि इससे उनकी कृषि भूमि को वर्षभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। टनल निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका है, जिससे जल्द ही जल आपूर्ति और सिंचाई शुरू होने की उम्मीद है।
क्षेत्र में विकास की नई राह
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर राजस्थान के हजारों ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा। साथ ही सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि से कृषि उत्पादन में भी बड़ा सुधार होगा। यह परियोजनाएँ प्रदेश के जल प्रबंधन को नई दिशा देने वाली साबित होंगी।


