भरतपुर जिले के भुसावर थाने में 23 फरवरी की रात हुई घटना ने पूरे पुलिस प्रशासन को हिला कर रख दिया। दो रिक्रूट कांस्टेबलों द्वारा एक युवती को थाने में लाने और उससे कथित दुर्व्यवहार के आरोपों ने मामला इतना गंभीर बना दिया कि जिला पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद ने बिना देरी दोनों कांस्टेबलों को पुलिस सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद विभाग पर कार्रवाई का दबाव भी बढ़ गया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। घटना के सामने आने के बाद न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। युवती के परिवार ने बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराई, लेकिन वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी की बयानबाजी ने घटना को स्पष्ट रूप से उजागर कर दिया।
आधी रात युवती को बाइक पर बैठाकर थाने लाए कांस्टेबल
मामला 23 फरवरी की देर रात का बताया जा रहा है। घटना का वीडियो बनाने वाले युवक के अनुसार, 22 फरवरी की रात लगभग 12 बजे उसके घर के पास एक बाइक अचानक रुकी। बाइक पर दो युवक थे, जिन्होंने पास खड़ी एक लड़की को साथ बैठाया और तेजी से बाइक चलाकर ले गए।
युवक को संदेह हुआ और उसने बाइक का पीछा करना शुरू किया। कुछ किलोमीटर तक पीछा करते हुए युवक ने देखा कि बाइक सीधे भुसावर पुलिस थाने के अंदर चली गई। थाने में पूछताछ करने पर पता चला कि दोनों युवक कोई आम नागरिक नहीं बल्कि भुसावर थाने में पदस्थ कांस्टेबल सोनू और परमवीर थे। युवक ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया था, जो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो आने के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और मामले की जांच शुरू की।
छेड़छाड़, बदतमीजी और मारपीट के आरोप
मामले के उजागर होने के बाद युवती के परिवार को जब घटना की जानकारी मिली तो वे थाने आए और युवती को अपने साथ ले गए। आरोप है कि दोनों कांस्टेबलों ने युवती के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उसके साथ छेड़छाड़ भी की।
वीडियो बनाने वाले युवक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उसने घटना को रिकॉर्ड किया तो थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल छीन लिया और जब्त कर लिया। युवक का यह भी कहना है कि उसके साथ मारपीट कर उसे थाने से हटाने की कोशिश की गई। यह आरोप पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं, विशेषकर तब जब कानून लागू करने वाले ही कानून का उल्लंघन करें।
एसपी दिगंत आनंद ने कही सख्त कार्रवाई की वजह
जिला पुलिस अधीक्षक दिगंत आनंद ने बताया कि दोनों कांस्टेबल रिक्रूट स्थिति में थे और प्रशिक्षण के दौरान ही उनके विरुद्ध ऐसा गंभीर मामला सामने आना पुलिस सेवा के मानकों के विपरीत है। एसपी ने कहा कि प्रारंभिक जांच में ही “नैतिक पतन” और “परिवीक्षा अवधि में आचरण संबंधी मानकों के उल्लंघन” के स्पष्ट प्रमाण मिले। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में औपचारिक जांच की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि तथ्यों में कोई संदेह की स्थिति नहीं बची थी। इसी आधार पर दोनों कांस्टेबलों—सोनू कुलदीप और परमिंदर—को तत्काल प्रभाव से पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
पुलिस छवि पर सवाल और स्थानीय प्रतिक्रिया
इस घटना ने पुलिस विभाग की छवि को गहरा आघात पहुंचाया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा देने वाले ही यदि इस तरह की घटनाओं में संलिप्त पाए जाएंगे तो आम जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
घटना के बाद गांव में भी आक्रोश देखा गया। हालांकि युवती के परिवार ने आगे कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन वीडियो और प्रत्यक्षदर्शी के बयान ने मामले को गंभीर बना दिया।


