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BCR चुनाव 2026 का ऐलान, 22 अप्रैल को मतदान; पहली बार महिला आरक्षण लागू

BCR चुनाव 2026 का ऐलान, 22 अप्रैल को मतदान; पहली बार महिला आरक्षण लागू

राजस्थान के विधिक परिदृश्य में लंबे समय से प्रतीक्षित बार काउंसिल ऑफ राजस्थान (BCR) के चुनावों की औपचारिक घोषणा के साथ ही अधिवक्ताओं के बीच उत्साह का माहौल बन गया है। करीब तीन वर्ष की देरी और पिछले चुनाव के आठ वर्ष बाद हो रही इस प्रक्रिया को प्रदेश के 1 लाख से अधिक अधिवक्ताओं के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की स्वीकृति के बाद जारी कार्यक्रम ने न केवल चुनावी प्रक्रिया को गति दी है, बल्कि इस बार कई ऐतिहासिक बदलावों की नींव भी रखी है।

बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के कार्यवाहक सचिव विकास ढाका द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार चुनावी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू हो गई है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 मार्च को किया जाएगा, जिस पर 8 से 14 मार्च तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इसके बाद 21 मार्च को संशोधित अंतिम सूची जारी की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है, ताकि चुनाव निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो सकें।

नामांकन प्रक्रिया 22 से 28 मार्च तक जोधपुर स्थित बार काउंसिल कार्यालय में संचालित होगी। इच्छुक उम्मीदवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक भौतिक रूप से अथवा पंजीकृत डाक के माध्यम से अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 29 और 30 मार्च को की जाएगी तथा 31 मार्च को वैध उम्मीदवारों की सूची प्रकाशित की जाएगी। उम्मीदवार 2 अप्रैल को शाम 5 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे। मतदान 22 अप्रैल को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वरीयता प्रणाली के आधार पर होगा। मतपेटियों के संकलन के बाद 29 अप्रैल को मतगणना प्रारंभ होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

ऐतिहासिक रूप से इस बार का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुपालन में कुल 25 सीटों में से कम से कम 5 सीटें महिला उम्मीदवारों से भरी जाना अनिवार्य किया गया है। इनमें 23 निर्वाचित और 2 मनोनीत सीटें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चुनाव के बाद दो महिला सदस्यों को सह-चयनित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में 25 सीटों में से एक भी महिला प्रतिनिधि निर्वाचित नहीं हो सकी थीं।

सुप्रीम कोर्ट के 16 जनवरी के आदेश के अनुसार महिला उम्मीदवारों के लिए अलग बैलेट पेपर नहीं होगा। मुख्य सूची में सर्वाधिक मत प्राप्त करने वाली महिला उम्मीदवारों को आरक्षित कोटे के अंतर्गत चुना जाएगा। इस व्यवस्था को समान अवसर और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

चुनाव में सीटों का गणित भी महत्वपूर्ण है। कुल 25 सीटों में से 12 सीटें उन अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित होंगी जो कम से कम 10 वर्षों से राज्य रोल पर पंजीकृत हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य अनुभवी अधिवक्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है, ताकि परिषद के निर्णयों में व्यावसायिक अनुभव का लाभ मिल सके।

नामांकन शुल्क और फॉर्म की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी गई है। उम्मीदवार जोधपुर स्थित कार्यालय से 5 हजार रुपये में नामांकन फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं और एक उम्मीदवार अधिकतम चार फॉर्म ले सकता है। सामान्य श्रेणी के लिए गैर-वापसी योग्य नामांकन शुल्क 1 लाख 25 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के ‘पंकज सिन्हा बनाम बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ मामले में दिए गए निर्देशों के तहत विशेष योग्यजन अधिवक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान की गई है। इस श्रेणी के उम्मीदवारों से केवल 15 हजार रुपये का सांकेतिक शुल्क लिया जाएगा।

पिछले चुनाव 28 मार्च 2018 को आयोजित हुए थे, जिनमें लगभग 60 हजार अधिवक्ता मतदाता सूची में शामिल थे। नियमानुसार परिषद का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जो 2023 में समाप्त हो गया था। कोविड-19 महामारी, मतदाता सूची के सत्यापन की जटिल प्रक्रिया और आरक्षण से जुड़े कानूनी विवादों के कारण चुनाव समय पर नहीं हो सके। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अब करीब तीन वर्ष की देरी के बाद यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पुनः प्रारंभ हो रही है।

प्रशासनिक तैयारियों के तहत सभी जिला और उपखंड बार एसोसिएशनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चुनाव अधिसूचना को अपने नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें। अधिसूचना को आधिकारिक गजट तथा प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित करने की तैयारी भी पूर्ण कर ली गई है।

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