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अजमेर जिला परिषद के वार्ड बढ़े, 33 वार्डों का ड्राफ्ट जारी — 6 जनवरी तक आपत्तियां आमंत्रित

अजमेर जिला परिषद के वार्ड बढ़े, 33 वार्डों का ड्राफ्ट जारी — 6 जनवरी तक आपत्तियां आमंत्रित

मनीषा शर्मा, अजमेर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। इसी के तहत अजमेर जिला परिषद के वार्डों का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। नए परिसीमन के बाद अब जिला परिषद में 33 वार्ड होंगे, जबकि पहले इनकी संख्या 32 थी। यह बदलाव प्रशासनिक संरचना के पुनर्गठन और ब्यावर को नया जिला घोषित किए जाने के बाद लागू किया गया है।

ड्राफ्ट के मुताबिक, विभिन्न पंचायतों और पंचायत समितियों का पुनर्गठन किया गया है। यदि किसी नागरिक या जनप्रतिनिधि को किसी वार्ड, सीमा या पंचायत के समावेश को लेकर आपत्ति हो, तो वह इसे लिखित रूप में दर्ज करा सकता है। फाइनल ड्राफ्ट जारी होने से पहले सभी आपत्तियों पर विचार कर सुधार किए जाएंगे।

नोटिफिकेशन के साथ शुरू हुई औपचारिक प्रक्रिया

अजमेर कलेक्टर लोकबंधु ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषद वार्डों का ड्राफ्ट 30 दिसंबर 2025 को प्रकाशित कर दिया गया। यह ड्राफ्ट राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम 1994 और निर्वाचन नियम 1994 के तहत तैयार किया गया है।

ग्रामीण नागरिकों तथा संबंधित संस्थाओं को 6 जनवरी 2026 तक आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया है। ये आपत्तियां:

  • उपखण्ड अधिकारी

  • तहसीलदार

  • या जिला कलेक्टर कार्यालय

में लिखित रूप में प्रस्तुत की जा सकती हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारी प्राप्त आपत्तियों को नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करेंगे और आगे की कार्रवाई के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय भेजेंगे।

ब्यावर नया जिला बना, इसलिए बढ़ा सिर्फ एक वार्ड

पहले अजमेर जिला परिषद में ब्यावर का क्षेत्र भी सम्मिलित था और कुल वार्ड 32 थे। लेकिन नए परिसीमन में ब्यावर अलग जिला बना, कई वार्ड टूटे, और पुनर्गठन के बाद संख्या बढ़कर 33 हो गई। यानी संख्या बढ़ने की पूरी संभावना थी, लेकिन नई सीमाओं के बनने से कई वार्ड स्वतः विभाजित हो गए और अंतिम गणना केवल एक वार्ड की बढ़ोतरी तक सीमित रह गई।

पंचायत समितियों का बड़ा पुनर्गठन

अजमेर जिला परिषद के अंतर्गत पहले 11 पंचायत समितियां थीं। नए बदलाव में:

  • मसूदा और जवाजा पंचायत समितियां ब्यावर जिले में सम्मिलित

  • बडल्या को नई पंचायत समिति का दर्जा

अब अजमेर जिले में 10 पंचायत समितियां बची हैं, जिनका परिसीमन चल रहा है। इसी के साथ वार्डों की जनसंख्या सीमा में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ। पहले एक वार्ड में 7 हजार से अधिक आबादी निर्धारित थी, जिसे घटाकर अब करीब 3 हजार कर दिया गया है। इससे प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होने की उम्मीद जताई जा रही है।

कई ग्राम पंचायतें अलग—कई नई जोड़ी गईं

ड्राफ्ट में वार्ड-वार विस्तृत सूची जारी की गई है, जिसमें यह बताया गया है कि किस वार्ड में कौन-सी ग्राम पंचायतें सम्मिलित होंगी। उदाहरण के तौर पर वार्ड संख्या 1 में अजमेर ग्रामीण क्षेत्र की बांसेली, कालस, खोरी, कौल और गनाहेड़ा जैसी पंचायतें शामिल की गई हैं। इसी तरह पीसांगन, श्रीनगर, भिनाय, सावर, केकड़ी, अराई, सिलोरा और बडल्या के कई गांव अलग-अलग वार्डों में समाहित किए गए हैं। यह संतुलन इस तरह रखा गया है कि ग्रामीण जनसंख्या, भौगोलिक निकटता और प्रशासनिक सुविधा, तीनों का समन्वय हो सके।

अजमेर ग्रामीण पंचायत समिति में बड़े बदलाव

अजमेर ग्रामीण पंचायत समिति में पहले 41 वार्ड थे, जिन्हें घटाकर अब 19 वार्ड कर दिया गया है। इसमें नई ग्राम पंचायतों — होकरा, गोधलिया, कायमपुरा और छातड़ी — को शामिल किया गया है। साथ ही कई पुरानी पंचायतों को नई गठित बडल्या पंचायत समिति में स्थानांतरित कर दिया गया है। यही वजह है कि अजमेर ग्रामीण क्षेत्र का आकार प्रशासनिक रूप से छोटा दिखाई दे रहा है, जबकि कार्यकुशलता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

आपत्तियों पर मिलेगा पूरा अवसर

जिला प्रशासन का कहना है कि ड्राफ्ट केवल प्रारंभिक प्रस्ताव है। यदि किसी गांव का समावेश गलत श्रेणी में हुआ है, दूरी अधिक पड़ती है, या आबादी के अनुपात में असंतुलन दिख रहा है, तो लोग अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। इन आपत्तियों पर विचार के बाद ही अंतिम सूची प्रकाशित होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पंचायत या वार्ड बिना सुने निर्णय के दायरे में न रहे।

चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण चरण

यह परिसीमन प्रक्रिया पंचायत चुनावों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। नया नक्शा तय करेगा कि आने वाले समय में:

  • कौन सा क्षेत्र किस वार्ड से जुड़ेगा

  • किस प्रतिनिधि के पास कितनी आबादी की जिम्मेदारी होगी

  • और स्थानीय विकास योजनाओं का वितरण किस तरह होगा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्यावर के अलग होने और नई पंचायत समितियों के गठन से ग्रामीण राजनीति में नई समीकरण बनेंगे।

अगला चरण — अंतिम ड्राफ्ट और अधिसूचना

6 जनवरी तक आपत्तियां मिलने के बाद उनका परीक्षण होगा। उचित संशोधन के बाद फाइनल ड्राफ्ट जारी किया जाएगा और फिर चुनावी तैयारी औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी। ग्रामीणों में भी उत्सुकता है कि उनका गांव किस वार्ड के अंतर्गत अंतिम रूप से शामिल होगा और उनका प्रतिनिधि कौन-सा क्षेत्र कवर करेगा।

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