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टीकाराम जूली का आरोप, सरकार चहेतों के लिए पहाड़ों को बर्बाद कर रही है

टीकाराम जूली का आरोप, सरकार चहेतों के लिए पहाड़ों को बर्बाद कर रही है

शोभना शर्मा।  अरावली पर्वतमाला को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर शुरू हुई मुहिम अब सड़कों तक पहुंचने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार अरावली से जुड़े फोटो और वीडियो साझा कर केंद्र और राजस्थान की भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। इसी क्रम में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अलवर स्थित अपने कार्यालय पर प्रेस वार्ता कर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए और अरावली को बचाने के लिए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

‘अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, चार राज्यों की जीवनरेखा’

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा जैसे चार बड़े राज्यों की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि अरावली रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और भूजल रिचार्ज के जरिए लाखों लोगों को पानी उपलब्ध कराती है। अगर अरावली कमजोर होती है तो इसका सीधा असर पर्यावरण, जलस्तर और मानव जीवन पर पड़ेगा।

सरकार पर चहेतों को फायदा पहुंचाने का आरोप

टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारें अपने चहेते लोगों और बड़े कारोबारी समूहों को फायदा पहुंचाने के लिए अरावली को बर्बाद करने की नीति पर काम कर रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर दिखावा किया जा रहा है, जबकि जमीन पर इसके ठीक उलट फैसले लिए जा रहे हैं। जूली के अनुसार खनन और विकास के नाम पर अरावली के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

‘लाखों लोगों और वन्यजीवों से जुड़ा है अरावली का अस्तित्व’

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अरावली क्षेत्र से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। यहां रहने वाले ग्रामीण, आदिवासी और वन आश्रित समुदाय सीधे तौर पर इस पर्वतमाला पर निर्भर हैं। इसके साथ ही अरावली हजारों वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। उन्होंने बताया कि सरिस्का, रणथंभौर और मुकुंदरा जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व और कई वन क्षेत्र अरावली पर्वतमाला के अंतर्गत आते हैं। सरकार की नीतियों से इन संरक्षित क्षेत्रों के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

लोगों को गुमराह करने का आरोप

टीकाराम जूली ने सरकार और उसके मंत्रियों पर जनता को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा अरावली को लेकर तैयार किया गया प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया था। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने कोई नया प्रस्ताव तैयार नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने केवल अरावली क्षेत्र में पहले से चल रही खानों के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट की थी और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया था।

भाजपा सरकार के नए प्रस्ताव पर गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा सरकार ने अरावली को लेकर एक नया प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत पर्वतमाला क्षेत्र में नए खनन को मंजूरी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार की एक कमेटी द्वारा तैयार किया गया है और इसके दूरगामी और खतरनाक परिणाम सामने आ सकते हैं। टीकाराम जूली के अनुसार यह योजना अरावली को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।

‘पर्यावरण के नाम पर विनाश की तैयारी’

प्रेस वार्ता के दौरान टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण की आड़ में अरावली के विनाश की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जल संकट, बढ़ता तापमान और वन्यजीवों का विस्थापन इसके प्रमुख उदाहरण होंगे।

सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी

टीकाराम जूली ने साफ संकेत दिए कि कांग्रेस पार्टी अरावली को बचाने के लिए अपना अभियान और तेज करेगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण की है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेगी और सरकार की नीतियों के खिलाफ जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने आम जनता, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की।

अरावली बना सियासी और सामाजिक संघर्ष का केंद्र

अरावली पर्वतमाला अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़े सियासी और सामाजिक संघर्ष का रूप ले चुकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सरकार अपने फैसलों पर क्या रुख अपनाती है और अरावली के संरक्षण को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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