मनीषा शर्मा। उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी (MLSU) के 33वें दीक्षांत समारोह में रविवार को शिक्षा, संस्कार और सामाजिक दायित्व का संगम देखने को मिला। आरएनटी मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि जीवन की एक नई और जिम्मेदार शुरुआत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से अर्जित ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत प्रगति के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के हित में होना चाहिए।
दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक सत्र 2024 के अंतर्गत विभिन्न संकायों के 91 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रायोजित स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए, जबकि 255 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित फार्मेसी भवन का डिजिटल उद्घाटन भी किया, जिसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया।
अपने संबोधन में राज्यपाल बागडे ने तैत्तिरीय उपनिषद् का उल्लेख करते हुए कहा कि आचार्य द्वारा दी गई अंतिम शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलना और धर्म का आचरण करना विद्यार्थी जीवन की मूल भावना है। राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय विशेष से नहीं, बल्कि कर्तव्य के पालन से है। उन्होंने युवाओं से आजीवन सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने और मानवता के कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा की याद दिलाते हुए कहा कि पहले शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि गुरु शिष्य के चरित्र, आचरण और व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देते थे। आज का दीक्षांत समारोह उसी परंपरा का आधुनिक स्वरूप है, जहां विद्यार्थी न केवल डिग्री प्राप्त करता है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझता है।
मेवाड़ की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने महाराणा सांगा और मीरा बाई का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है, इसके बावजूद लंबे समय तक हमें मुगलों का इतिहास ही पढ़ाया गया। अब समय आ गया है कि हम अपने गौरवशाली अतीत को समझें और उसे शिक्षा का हिस्सा बनाएं। उनका कहना था कि इतिहास से प्रेरणा लेकर ही आने वाली पीढ़ियां आत्मगौरव और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत बन सकती हैं।
राज्यपाल बागडे ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नैक से ‘ए’ ग्रेड प्राप्त करना और NIRF रैंकिंग में स्थान बनाना संस्थान की गुणवत्ता, शिक्षकों की मेहनत और प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों और कर्मचारियों को इन उपलब्धियों के लिए बधाई दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी पाना नहीं है। शिक्षा का वास्तविक लक्ष्य नैतिकता, अनुशासन, चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास होना चाहिए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से संवेदनशील, जागरूक और विचारशील नागरिक बनने की अपेक्षा जताई। साथ ही उन्होंने युवाओं को स्टार्टअप, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों से जुड़कर देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में दीक्षांत भाषण पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने दिया। उन्होंने विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि इस वर्ष स्वर्ण पदक और डिग्री प्राप्त करने में छात्राएं संख्यात्मक रूप से आगे रही हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कटारिया ने कहा कि आज की पीढ़ी पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल पैकेज के पीछे भाग रही है, जबकि व्यक्ति की असली पहचान उसके व्यवहार, नम्रता और संस्कार से होती है।
उन्होंने गुरु की भूमिका को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि शिक्षक ही बच्चे का चरित्र गढ़ता है और उसे सही दिशा दिखाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे सफलता के साथ-साथ विनम्रता को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
समारोह में कुल 255 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 111 छात्र और 144 छात्राएं शामिल रहीं। कुलाधिपति स्वर्ण पदक 8 छात्राओं को, विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक 90 विद्यार्थियों को और प्रायोजित स्वर्ण पदक 11 विद्यार्थियों को प्रदान किए गए। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. बीपी सारस्वत ने विश्वविद्यालय की वार्षिक उपलब्धियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन रजिस्ट्रार डॉ. बीसी गर्ग ने किया।


