मनीषा शर्मा। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार को मुंबई से जोधपुर पहुंचे। जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने गोवा में हाल ही में आयोजित कला उत्सव की जमकर सराहना की। शेखावत ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी गोवा का यह अनूठा कला उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है और इसने देश-विदेश के कला प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
उन्होंने कहा कि इस उत्सव में प्रस्तुत ऑडियो-विजुअल कार्यक्रमों ने दर्शकों को बेहद प्रभावित किया। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला के बेहतरीन समन्वय ने इस आयोजन को खास बना दिया। शेखावत के अनुसार, कला उत्सव में दिखाए गए कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मकता और कलात्मक सोच को भी मजबूती से प्रस्तुत किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच मिलता है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। गोवा कला उत्सव जैसे कार्यक्रम भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं और युवाओं को कला, संगीत और संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं।
SIR मुद्दे पर विपक्ष को घेरा
मीडिया से बातचीत के दौरान गजेंद्र सिंह शेखावत ने SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विपक्ष के विरोध पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बेहद हैरानी की बात है कि जो लोग पहले SIR की मांग कर रहे थे, वही आज इसका विरोध कर रहे हैं। शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि विरोध करने वालों को खुद यह नहीं पता कि वे किस मुद्दे पर और क्यों विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ विपक्ष में होने के कारण विरोध करना कुछ राजनीतिक दलों की आदत बन चुकी है। ऐसे लोग हर उस प्रक्रिया का विरोध करने लगते हैं, जो पारदर्शिता और सुधार की दिशा में कदम बढ़ाती है। शेखावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि SIR को लेकर विरोध करने वाले खुद भ्रम की स्थिति में हैं, जबकि सरकार और चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कुछ नेता कुछ समय पहले तक SIR की आवश्यकता पर जोर दे रहे थे, लेकिन अब राजनीतिक कारणों से उसी प्रक्रिया के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना राजनीति करार दिया और कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर अनावश्यक सवाल खड़े होते हैं।
संसद में विपक्ष के रवैये पर टिप्पणी
संसद में विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे पर भी गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद का उद्देश्य देश की योजनाओं, नीतियों और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करना है। सदन में यह विचार होना चाहिए कि सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर कैसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
शेखावत ने अफसोस जताते हुए कहा कि दुर्भाग्य से कुछ लोग संसद को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति का अखाड़ा बना देते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार के व्यवधान और हंगामे से न केवल संसदीय कार्य प्रभावित होता है, बल्कि जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा भी बाधित होती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अपना महत्व है, लेकिन विरोध का तरीका भी जिम्मेदार और रचनात्मक होना चाहिए। केवल नारेबाजी और अवरोध पैदा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
सरकार की प्राथमिकताएं और पारदर्शिता
गजेंद्र सिंह शेखावत ने दोहराया कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। चाहे वह चुनावी सुधारों का मुद्दा हो या प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने का, सरकार का लक्ष्य लोकतंत्र को और सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि SIR जैसी प्रक्रियाएं चुनावी व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी हैं। सरकार का फोकस राजनीतिक लाभ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने पर है।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की दिशा
जोधपुर एयरपोर्ट पर दिया गया शेखावत का यह बयान न केवल विपक्ष पर तीखा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि केंद्र सरकार आने वाले समय में पारदर्शिता और सुधारों के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। वहीं गोवा कला उत्सव की सराहना के जरिए उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्कृति और पर्यटन सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं।


