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खेजड़ी बचाओ आंदोलन: 19 दिसंबर को मुकाम में बिश्नोई समाज की विशाल महापंचायत

खेजड़ी बचाओ आंदोलन: 19 दिसंबर को मुकाम में बिश्नोई समाज की विशाल महापंचायत

मनीषा शर्मा। पर्यावरण संरक्षण और खेजड़ी बचाओ आंदोलन को लेकर राजस्थान में एक बार फिर बड़ा जनआंदोलन आकार लेने जा रहा है। बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों के आह्वान पर 19 दिसंबर को बीकानेर जिले के मुक्तिधाम मुकाम (नोखा) में विशाल महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। यह महापंचायत राज्य सरकार के उस फैसले के विरोध में बुलाई गई है, जिसमें हरे वृक्षों को काटने पर मात्र 1000 रुपए का जुर्माना तय किया गया है। बिश्नोई समाज का मानना है कि यह निर्णय न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि यह खेजड़ी जैसे जीवनदायी वृक्षों की अंधाधुंध कटाई को भी बढ़ावा देगा।

1000 रुपए जुर्माने के फैसले पर बिश्नोई समाज का कड़ा ऐतराज

पर्यावरण प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रामनिवास बुधनगर ने बताया कि बिश्नोई समाज लंबे समय से राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित सभी हरे वृक्षों के संरक्षण के लिए सख्त कानून की मांग करता आ रहा है। उनका कहना है कि केवल 1000 रुपए का जुर्माना किसी भी तरह से प्रभावी नहीं हो सकता। यह राशि इतनी कम है कि इससे पेड़ काटने वालों पर कोई रोक नहीं लगेगी। परिणामस्वरूप पर्यावरण असंतुलन, जैव विविधता का नुकसान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा होगा। बिश्नोई समाज ने इस निर्णय को सीधे तौर पर पर्यावरण विरोधी करार देते हुए कहा है कि यदि समय रहते इस पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका दुष्परिणाम पूरे राज्य को भुगतना पड़ेगा।

खेजड़ी: केवल वृक्ष नहीं, जीवन और संस्कृति का प्रतीक

राजस्थान में खेजड़ी का महत्व केवल एक वृक्ष तक सीमित नहीं है। यह मरुस्थलीय क्षेत्र में जीवन का आधार मानी जाती है। खेजड़ी मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पशुओं के चारे, छाया और पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती है। बिश्नोई समाज के लिए खेजड़ी आस्था और बलिदान का प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि खेजड़ी की रक्षा के लिए बिश्नोई समाज ने अपने प्राणों तक की आहुति दी है। ऐसे में इस वृक्ष की कटाई पर हल्का जुर्माना तय करना समाज की भावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की मूल भावना के भी खिलाफ माना जा रहा है।

देशभर के संतों की सानिध्य में तय होगी आंदोलन की रणनीति

19 दिसंबर को मुकाम में होने वाली महापंचायत में राजस्थान सहित देशभर के संतों की उपस्थिति प्रस्तावित है। संतों के सानिध्य में आंदोलन की आगे की रणनीति और रूपरेखा तय की जाएगी। बिश्नोई समाज का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं है, बल्कि एक संगठित और निर्णायक आंदोलन खड़ा करना है, जिससे सरकार को सख्त पर्यावरण कानून बनाने के लिए मजबूर किया जा सके। महापंचायत में यह भी तय किया जाएगा कि आंदोलन को किस रूप में आगे बढ़ाया जाए, ताकि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण प्रेमियों को एकजुट करने का आह्वान

इस महापंचायत को केवल बिश्नोई समाज तक सीमित नहीं रखा गया है। आयोजकों ने संपूर्ण पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया है। उद्देश्य यह है कि खेजड़ी और हरे वृक्षों की रक्षा को जनआंदोलन का रूप दिया जाए, ताकि सरकार पर व्यापक जनदबाव बनाया जा सके।

जोधपुर सहित कई जिलों से हजारों लोगों के पहुंचने की उम्मीद

महापंचायत को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जोधपुर सहित राजस्थान के कई जिलों से हजारों पर्यावरण प्रेमी 19 दिसंबर की सुबह मुकाम के लिए रवाना होंगे। महापंचायत में भाग लेकर लोग खेजड़ी और हरे वृक्षों की सुरक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लेंगे। बिश्नोई समाज का कहना है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग

महापंचायत का मुख्य उद्देश्य सरकार से हरे वृक्षों की कटाई पर कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू करने की मांग करना है। समाज का कहना है कि जब तक कानून सख्त नहीं होंगे, तब तक अवैध कटाई पर लगाम लगाना संभव नहीं है।

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