शोभना शर्मा। भारत की पारंपरिक हस्तकला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि आने वाले समय में कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात हर साल 1 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह संभावना इसलिए मजबूत हुई है क्योंकि इटली की प्रसिद्ध लग्जरी फैशन कंपनी प्राडा ने भारत की दो सरकारी कंपनियों के साथ मिलकर कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल बनाने के लिए समझौता किया है। यह साझेदारी न केवल भारतीय कारीगरों के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि भारत की पारंपरिक फुटवियर कला को वैश्विक फैशन मैप पर मजबूती से स्थापित कर सकती है।
पीयूष गोयल बोले– कोल्हापुरी को क्यों नहीं मिला बड़ा ब्रांड दर्जा
पीयूष गोयल ने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि प्राडा और भारत के कोल्हापुरी चप्पल बनाने वाले कारीगर एक साथ काम करने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह लंबे समय से यह सोचते रहे हैं कि कोल्हापुरी चप्पलें, जो अपने सुंदर डिजाइन, हाथ से तैयार की जाने वाली कारीगरी, चमकीले रंगों और पहनने में आरामदायक होने के लिए जानी जाती हैं, अब तक एक बड़ा वैश्विक ब्रांड क्यों नहीं बन पाईं। उनका मानना है कि गुणवत्ता और आराम के मामले में कोल्हापुरी चप्पलें किसी भी अंतरराष्ट्रीय फुटवियर से कम नहीं हैं, लेकिन इन्हें सही मंच और पहचान नहीं मिल पाई।
निर्यात को 1 अरब डॉलर तक पहुंचाने का सपना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राडा द्वारा इस पारंपरिक कला को पहचानना भारत के लिए गर्व की बात है। अब दुनिया भर के उपभोक्ता कोल्हापुरी चप्पलों को एक नए और प्रीमियम रूप में देख सकेंगे। गोयल ने साफ कहा कि उनका सपना है कि भारत से कोल्हापुरी चप्पलों का निर्यात 1 अरब डॉलर तक पहुंचे और मौजूदा समझौते के बाद यह लक्ष्य अब असंभव नहीं लगता। इटली के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी से मुलाकात के बाद गोयल ने कहा कि कोल्हापुरी चप्पलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जो व्यक्ति एक बार इन्हें पहन लेता है, वह फिर किसी दूसरी चप्पल को अपनाना नहीं चाहता।
मुंबई में हुआ अहम समझौता
यह समझौता मुंबई स्थित इटली के कॉन्सुलेट जनरल में संपन्न हुआ, जिसमें भारत की दो सरकारी कंपनियां लिडकॉम और लिडकार शामिल हैं। इन कंपनियों का काम पारंपरिक चमड़ा उत्पादों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देना है। समझौते के तहत प्राडा की तकनीकी टीम ने कोल्हापुर का दौरा किया और वहां के कारीगरों से मुलाकात कर पारंपरिक तरीके से चप्पल बनाने की प्रक्रिया को करीब से समझा। इस पहल का मकसद पारंपरिक शिल्प को बनाए रखते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप पेश करना है।
फरवरी 2026 में होगी ग्लोबल लॉन्चिंग
प्राडा की कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल को फरवरी 2026 में लॉन्च किया जाएगा। यह सैंडल दुनिया भर के 40 चुनिंदा प्राडा स्टोर्स और कंपनी के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। इससे पहले प्राडा को उस समय आलोचना का सामना करना पड़ा था, जब उसने बिना भारतीय कारीगरों को श्रेय दिए कोल्हापुरी-स्टाइल सैंडल करीब 1.2 लाख रुपए की कीमत पर बेची थीं। आलोचना के बाद कंपनी ने भारत में अपने अधिकारियों को भेजा और अब औपचारिक रूप से भारतीय कारीगरों के साथ साझेदारी का रास्ता अपनाया है।
भारत-इटली और यूरोप के साथ बढ़ेगा सहयोग
पीयूष गोयल ने यह भी कहा कि भारत यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही भारत और इटली के बीच तकनीक, रक्षा, कपड़ा, कृषि और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। उनका मानना है कि इस तरह की साझेदारियां भारतीय परंपरागत उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगी।
कारीगरों के लिए बदलेगा भविष्य
कुल मिलाकर, प्राडा और भारतीय सरकारी कंपनियों के बीच हुआ यह समझौता कोल्हापुरी चप्पल उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि हजारों कारीगरों को स्थायी रोजगार, बेहतर आय और अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिलेगी। भारत की पारंपरिक कला को जब वैश्विक ब्रांड का साथ मिलता है, तो उसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।


