मनीषा शर्मा। कोटा में आयकर विभाग की छापेमारी की कार्रवाई लगातार दूसरे दिन भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जिंक कारोबार से जुड़ी कंपनी मित्तल पिगमेंट प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर मंगलवार को शुरू हुई सर्च ऑपरेशन बुधवार को भी जारी रही। जानकारी के अनुसार दिल्ली से आई आयकर विभाग की टीम ने कोटा में करीब 10 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी है। इनमें कंपनी का इंडस्ट्रियल प्लांट, कॉर्पोरेट ऑफिस और कंपनी प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के आवास शामिल हैं।
छापेमारी की शुरुआत मंगलवार सुबह हुई थी और देर रात तक यह कार्रवाई जारी रही। बुधवार को भी अधिकारी कंपनी से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की गहन जांच में जुटे रहे। आयकर विभाग को आशंका है कि कंपनी ने अपनी वास्तविक आय को छुपाकर कर चोरी की है और फर्जी कंपनियों के जरिए वित्तीय अनियमितताएं की हैं।
प्लांट और कार्यालय सील
जांच टीम ने इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र स्थित रोड नंबर 5 पर बने मित्तल पिगमेंट के प्लांट को पूरी तरह से सील कर दिया है। इसके अलावा कंपनी के कॉर्पोरेट कार्यालय और निदेशकों से जुड़े आवासों को भी घेराबंदी में लिया गया है। छापेमारी के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति को इन परिसरों में प्रवेश की अनुमति नहीं है। वहीं, कर्मचारियों को भी जांच पूरी होने तक बाहर ही रोक दिया गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन की जांच
आयकर अधिकारियों की टीम कंपनी के कंप्यूटरों और सर्वर में दर्ज डिजिटल डेटा को खंगाल रही है। इसके अलावा बैंक खातों से जुड़े लेन-देन, बिल, भुगतान और निवेश से संबंधित सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक टीम को कई ऐसे रिकॉर्ड मिलने की उम्मीद है, जिनसे कंपनी के टैक्स चोरी के तरीकों का खुलासा हो सकता है।
दिल्ली और अन्य शहरों में भी नजर
मित्तल पिगमेंट प्राइवेट लिमिटेड जिंक और खनन उद्योग में एक स्थापित नाम है। कंपनी की पहचान न सिर्फ राजस्थान, बल्कि दिल्ली और अन्य राज्यों में भी है। आयकर विभाग की टीम का मानना है कि यह कार्रवाई केवल कोटा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कंपनी के दिल्ली और अन्य शहरों में मौजूद कार्यालयों और ठिकानों पर भी नजर रखी जा रही है। इससे यह साफ होता है कि जांच का दायरा और भी व्यापक हो सकता है।
उद्योग जगत में हलचल
कोटा में हुई इस छापेमारी ने उद्योग जगत में हलचल मचा दी है। मित्तल पिगमेंट प्राइवेट लिमिटेड खनन और जिंक उत्पादन के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही है। ऐसे में आयकर विभाग की अचानक हुई इस कार्रवाई ने कारोबारी जगत के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर भी यह चर्चा है कि अगर जांच में बड़े पैमाने पर कर चोरी सामने आती है, तो कंपनी को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
विभाग की चुप्पी बरकरार
हालांकि आयकर विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि अब तक की जांच में कई अहम दस्तावेज और डिजिटल प्रमाण मिले हैं। इनसे यह पता लगाया जाएगा कि कंपनी ने कितनी आय छुपाई और किन माध्यमों से टैक्स चोरी की गई। जांच पूरी होने के बाद ही विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।


