मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने अपने हालिया दौरों और जनसभाओं में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का मुद्दा प्रमुखता से उठाना शुरू कर दिया है। बेनीवाल का कहना है कि यदि धनखड़ खुद सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं तो पूरा जाट समाज उनके साथ खड़ा होगा। यहां तक कि ज़रूरत पड़ी तो समाज सड़कों पर उतरने और आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा। बेनीवाल के इस बयान ने राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। खासतौर पर जाट राजनीति में यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
बेनीवाल का बड़ा बयान: “धनखड़ सामने आएं, समाज उनके साथ है”
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। हालांकि अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसके पीछे का कारण साफ नहीं किया है। बेनीवाल ने जोर देकर कहा कि अगर धनखड़ खुद खुले मंच से सच्चाई उजागर करते हैं, तो जाट समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा मिलेगा। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि अन्याय की बात सामने आती है तो पूरा समाज दिल्ली से लेकर राजस्थान तक उनका समर्थन करेगा और जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरकर प्रतिरोध दर्ज कराएगा।
जाट महासभा का समर्थन
हनुमान बेनीवाल की इस आवाज़ को जाट महासभा से भी मजबूती मिली है। संगठन के प्रदेश सचिव कृष्ण कुमार जानू ने बेनीवाल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जगदीप धनखड़ को अब सामने आकर सच बताना चाहिए। जानू ने कहा, “यदि उनके साथ अन्याय हुआ है तो उन्हें इसे छुपाने की बजाय स्पष्ट करना चाहिए। अगर वे सामने आएंगे तो दिल्ली से लेकर राजस्थान तक का पूरा जाट समाज उनके साथ खड़ा मिलेगा।”
जानू ने यह भी जोड़ा कि धनखड़ के विदाई भाषण और उनके लिए फेयरवेल न होने जैसी घटनाएं कई सवाल खड़े करती हैं। समाज अब इंतजार कर रहा है कि वह खुद सामने आकर अपनी पीड़ा व्यक्त करें।
“समाज बदला लेने को भी तत्पर है”
कृष्ण कुमार जानू ने साफ शब्दों में कहा कि यदि धनखड़ के साथ कोई अन्याय हुआ है तो जाट समाज इसे यूं ही नहीं जाने देगा। उन्होंने कहा, “उनके एक आह्वान पर पूरा समाज बदला लेने के लिए भी तत्पर है। सरकारों को यह एहसास कराना होगा कि अगर किसी समाज के साथ अन्याय होगा तो उसका प्रतिरोध भी उतना ही प्रबल होगा।”
यह बयान न केवल राजस्थान की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ता है, बल्कि केंद्र की राजनीति तक इसके असर की संभावना दिखाई दे रही है।
भाजपा से निकाले गए कृष्ण कुमार जानू
इस बीच यह भी उल्लेखनीय है कि जाट महासभा के प्रदेश सचिव और बेनीवाल के बयान का समर्थन करने वाले कृष्ण कुमार जानू हाल ही में भाजपा से निष्कासित किए गए थे। भाजपा की प्रदेश अनुशासन समिति ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया।
अनुशासन समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि जानू को 20 जून को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे पार्टी विरोधी बयानों और गतिविधियों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
राजनीति में बढ़ती हलचल
हनुमान बेनीवाल और कृष्ण कुमार जानू के इस बयान ने साफ कर दिया है कि जाट राजनीति अब नए मुद्दों पर संगठित होने की ओर बढ़ रही है। बेनीवाल लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधते रहे हैं। अब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का मुद्दा उठाकर उन्होंने राजनीतिक समीकरण बदलने की ओर इशारा किया है।
धनखड़ का इस्तीफा और उसके बाद का मौन, राजनीतिक गलियारों में लगातार सवाल खड़े कर रहा है। विपक्ष इसे एक बड़ा मुद्दा बना सकता है। वहीं जाट समाज का खुला समर्थन इस मामले को और ज्यादा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना देता है।


