शोभना शर्मा। ब्यावर का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थान अमृतकौर चिकित्सालय इन दिनों खस्ताहाल अवस्थाओं से जूझ रहा है। भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए वहां रहना खतरे से खाली नहीं है। अस्पताल के कई हिस्सों में छत से पानी टपक रहा है, तो कहीं दीवारों और छतों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे लोगों को अत्यधिक असुविधा और डर का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर (ओटी) की है। ओटी की दीवारों में गहरी सीलन आ चुकी है। चिकित्सकों का मानना है कि इस तरह की सीलन से ऑपरेशन के दौरान संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा बना रहता है। इससे न केवल जटिल सर्जरी प्रभावित होती है, बल्कि ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीजों की रिकवरी पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है।
अस्पताल के निचले हिस्से में भी स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। कई वार्डों और कॉरिडोर में छतें टपकती रहती हैं। मानसून के इन दिनों में स्थिति और अधिक विकट हो गई है। स्थानीय नागरिकों, मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से बार-बार शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोग स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। यदि शीघ्र मरम्मत एवं पुनरुद्धार कार्य प्रारंभ नहीं किए गए, तो यह जर्जर संरचना भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
स्वास्थ्य सुविधाओं की बिगड़ती स्थिति, एक ओर जहां आमजन की जान जोखिम में डाल रही है, वहीं सरकारी दावों की हकीकत भी उजागर कर रही है। राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के दावों के बीच यह अस्पताल एक बुरी तस्वीर पेश कर रहा है।


