राजस्थान के बाड़मेर जिले में मंगलवार को मजदूरों की मांगों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे में बदल गया। प्रदर्शन के दौरान शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने गुस्से में खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि वहां मौजूद समर्थकों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए उनके शरीर पर डाला गया पेट्रोल कपड़ों से साफ किया और स्थिति को संभालने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी देखने को मिली।
मजदूरों की मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से क्षेत्र में तनाव बना हुआ था। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सोमवार को ही चेतावनी दी थी कि यदि मजदूरों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मंगलवार को बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अपनी इसी घोषणा के तहत मंगलवार को वे भारी संख्या में समर्थकों और मजदूरों के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करने निकले। बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन में करीब 500 गाड़ियों का विशाल काफिला शामिल था, जिसने पूरे इलाके में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
कानून-व्यवस्था को लेकर पहले से सतर्क प्रशासन ने प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। पुलिस ने कलेक्ट्रेट से लगभग एक किलोमीटर पहले ही बैरिकेड्स और बसें लगाकर रास्ता बंद कर दिया। भारी पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन को आशंका थी कि प्रदर्शन उग्र रूप ले सकता है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को काफी सख्त रखा गया था।
जब पुलिस ने काफिले को आगे बढ़ने से रोका, तब विधायक रविंद्र सिंह भाटी और उनके समर्थक वहां नहीं रुके। भाटी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने लगे। प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार नारेबाजी कर रही थी और मजदूरों की मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ विरोध जता रही थी। जैसे ही यह समूह कलेक्ट्रेट के पास पहुंचा, वहां मौजूद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल कई समर्थकों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। अपने समर्थकों पर हो रही कार्रवाई देखकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी काफी आक्रोशित हो गए। इसी दौरान उन्होंने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। यह दृश्य देखते ही वहां मौजूद लोग घबरा गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। समर्थकों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए पेट्रोल को कपड़ों से साफ किया और किसी बड़े हादसे को टाल दिया। इस बीच पुलिसकर्मियों ने विधायक और उनके समर्थकों को वहां से हटाने की कोशिश की, जिसके चलते धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला।
इस पूरे विवाद की जड़ गिरल माइंस से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। मजदूरों और स्थानीय लोगों की मांगें लंबे समय से इस क्षेत्र में चल रहे खनन और परिवहन कार्यों से संबंधित हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है और स्थानीय लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे। दूसरी ओर प्रशासन और कंपनियों का कहना है कि कामकाज को बाधित करने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।
घटनाक्रम को और संवेदनशील बनाने वाला पहलू यह भी रहा कि इस प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरल माइंस मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए थे। कोर्ट ने लिग्नाइट परिवहन तुरंत शुरू कराने और ट्रांसपोर्टेशन में लगे वाहनों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए थे कि यदि कोई व्यक्ति कानून हाथ में लेकर परिवहन कार्य में बाधा डालता है तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन पहले से अलर्ट मोड पर था। बाड़मेर पुलिस और स्थानीय प्रशासन को आशंका थी कि मजदूर आंदोलन के दौरान हालात बिगड़ सकते हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। कोर्ट के आदेशों के चलते पुलिस किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं देना चाहती थी। यही वजह रही कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटना राजस्थान की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है। रविंद्र सिंह भाटी पहले भी कई मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं और युवाओं तथा स्थानीय लोगों के बीच उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में मजदूर आंदोलन के दौरान उनके इस कदम ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
कुछ लोग विधायक के इस कदम को मजदूरों की आवाज बुलंद करने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कई लोग इसे राजनीतिक नाटकीयता करार दे रहे हैं। हालांकि इतना तय है कि इस घटना ने मजदूर आंदोलन को राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। विपक्षी दल भी अब इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं।
फिलहाल बाड़मेर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रही है और प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों की जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं मजदूर संगठनों और विधायक समर्थकों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।


