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शुद्ध आहार अभियान: अजमेर में मिलावट पर 23 लाख रुपए का जुर्माना

शुद्ध आहार अभियान: अजमेर में मिलावट पर 23 लाख रुपए का जुर्माना

शोभना शर्मा, अजमेर।   “शुद्ध आहार मिलावट पर वार” अभियान के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट और गुणवत्ता से जुड़े मामलों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश पर फूड सेफ्टी टीम ने मिलावटी और मिस ब्रांड खाद्य पदार्थों के 15 मामलों में 23 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत की गई, जिसमें सब-स्टैंडर्ड और मिस ब्रांडिंग के मामलों को न्यायनिर्णयन अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रशासन ज्योति ककवानी द्वारा निपटाया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉक्टर ज्योत्सना रंगा ने बताया कि जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित जांच अभियान चलाया गया। इसके तहत लिए गए सैंपल में कई खाद्य पदार्थ गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन मामलों को एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया, जहां जुर्माने की सख्त सिफारिश की गई।

सब-स्टैंडर्ड और मिस ब्रांडिंग के मामलों में कार्रवाई:

अजमेर  में फूड सेफ्टी टीम ने प्रमुख खाद्य विक्रेताओं और डेयरी संचालकों से सैंपल लिए। जांच के बाद, इन सैंपल्स को सब-स्टैंडर्ड (गुणवत्ता में कमी) और मिस ब्रांड (गलत लेबलिंग) के मामलों में वर्गीकृत किया गया। सब-स्टैंडर्ड मामलों में 5 लाख रुपए तक और मिस ब्रांडिंग के मामलों में 3 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। इस कार्रवाई के दौरान विभिन्न उत्पादों जैसे घी, मावा, दूध, पनीर, मिठाई, और मसालों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। रेफरल लैब मैसूर की रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए गए उत्पादकों और विक्रेताओं पर जुर्माना लगाया गया।

प्रमुख मामलों का विवरण:

अभियान के तहत कई प्रमुख विक्रेताओं पर कार्रवाई की गई। इनमें से कई मामलों में डेयरी उत्पाद जैसे घी, दूध, और मावा की जांच में मिलावट या गुणवत्ता की कमी पाई गई। उदाहरण के लिए, कोठारी मिल्क प्रोडक्ट्स का घी मिलावटी पाया गया और उस पर 2.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसी प्रकार, दीपक स्वीट्स एंड नमकीन की गुलाब जामुन की जांच में उत्पाद को “अनसेफ” घोषित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 2.5 लाख रुपए का जुर्माना किया गया।

इसके अलावा, रामसहाय कन्हैयालाल द्वारा बेचा गया मावा भी अनसेफ पाया गया। रिटेस्टिंग के बाद इसे सब-स्टैंडर्ड घोषित किया गया और 2.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। ऐसे ही अन्य उत्पाद जैसे कलाकंद, पनीर, और केसर बर्फी की जांच में भी मिलावट या गुणवत्ता की कमी पाई गई।

मिस ब्रांडिंग के मामले:

जांच के दौरान कई मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों में गलत लेबलिंग के मामले भी सामने आए। जैसे, जैन ट्रेडर्स के घी को मिस ब्रांड पाया गया और 1.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह, कमल प्रोविजन स्टोर द्वारा बेचा गया मिर्च पाउडर भी मिस ब्रांडिंग के तहत दोषी पाया गया और 1 लाख रुपए का जुर्माना किया गया।

रेफरल लैब की भूमिका:

सभी मामलों की जांच प्रक्रिया में रेफरल लैब मैसूर का विशेष योगदान रहा। रिटेस्टिंग के दौरान सैंपल्स की गुणवत्ता की पुष्टि की गई, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी दोषी विक्रेता बच न सके।

जिला प्रशासन की सख्ती:

जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देशन में यह सुनिश्चित किया गया कि इस अभियान में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ज्योति ककवानी ने कहा कि मिलावट पर सख्त कार्रवाई प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी खाद्य विक्रेताओं को चेतावनी दी है कि भविष्य में मिलावट के मामलों में और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

खाद्य विक्रेताओं के लिए संदेश:

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की मिलावट या गलत लेबलिंग पाए जाने पर जुर्माना ही नहीं, बल्कि अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। सभी खाद्य विक्रेताओं को समय-समय पर अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपभोक्ताओं को सलाह:

  • उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय सावधानी बरतें।
  • पैकिंग, लेबलिंग, और उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान दें।
  • किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत तुरंत फूड सेफ्टी टीम को करें।
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