शोभना शर्मा ,अजमेर। राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर इन दिनों 813वें उर्स की रौनक छाई हुई है। हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह में अपनी हाजिरी लगाने पहुंचे हैं। खासतौर पर पाकिस्तान से आए जायरीन इस साल अजमेर की व्यवस्थाओं और मेहमाननवाजी से काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं।
पाकिस्तानी जायरीनों का जत्था पहुंचा अजमेर
सोमवार देर रात पाकिस्तान से 89 जायरीनों का जत्था विशेष ट्रेन से अमृतसर के रास्ते अजमेर पहुंचा। इसमें दो दूतावासों के अधिकारी और कई अन्य जायरीन शामिल थे। इन्हें अजमेर के चूड़ी बाजार स्थित सेंट्रल गर्ल्स स्कूल में ठहराया गया। सुरक्षा और कस्टम जांच के बाद इन्हें दरगाह में जियारत की अनुमति दी गई।
पाकिस्तानी जायरीनों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। लगभग 600 सुरक्षाकर्मी इन जायरीनों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि इन विदेशी मेहमानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
ख्वाजा के दर पर पहुंचने पर जताई खुशी
पाकिस्तान से आए जायरीनों ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर अपनी चादर पेश की और देश-दुनिया में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी। कराची से आए जायरीन सैयद फराज इलाकत ने कहा, “हम बेहद खुशकिस्मत हैं कि हमें ख्वाजा गरीब नवाज के दर पर आने का मौका मिला।” उन्होंने कहा कि अजमेर की खूबसूरती और यहां के लोगों का नेकदिल व्यवहार दिल को छू लेने वाला है।
पीएम मोदी को कहा शुक्रिया
सैयद फराज इलाकत ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, “हमारे अजमेर आने के लिए भारत सरकार ने जो व्यवस्थाएं की हैं, वह काफी काबिले तारीफ हैं।” पाकिस्तानी जायरीनों ने भारत और पाकिस्तान के बीच अमन और भाईचारे का संदेश देने की बात कही।
भारत-पाक क्रिकेट मैच की मांग
पाकिस्तानी जायरीनों ने मीडिया से बातचीत में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच फिर से शुरू कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकता है। हालांकि, पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट मैच नहीं खेले गए हैं, और फैंस केवल आईसीसी टूर्नामेंट्स में ही इनका मुकाबला देख पाते हैं।
उर्स में नेताओं का चादर पेश करने का सिलसिला जारी
अजमेर दरगाह के 813वें उर्स में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेताओं ने भी चादर पेश की। पीएम मोदी की चादर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने दरगाह पर पेश की। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने भी अपनी चादर पेश की।
अजमेर दरगाह पर चादर चढ़ाने की परंपरा
अजमेर दरगाह पर चादर चढ़ाना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह परंपरा न केवल धार्मिक है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का संदेश भी देती है। खासतौर पर पाकिस्तान से आए जायरीनों के लिए यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर होता है, जब वे अपने देश की चादर लेकर ख्वाजा साहब की दरगाह पर हाजिरी लगाते हैं।
अजमेर की व्यवस्थाओं की तारीफ
इस बार पाकिस्तानी जायरीनों ने दरगाह और शहर की व्यवस्थाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन ने उनकी मेहमाननवाजी में कोई कमी नहीं छोड़ी। दरगाह के आसपास के क्षेत्र में सफाई, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं उच्च स्तर की हैं।
भारत-पाक संबंधों में भाईचारे का संदेश
अजमेर उर्स हर साल भारत और पाकिस्तान के बीच भाईचारे और सांस्कृतिक मेलजोल का प्रतीक बनता है। यहां आने वाले जायरीन अमन और मोहब्बत का पैगाम लेकर लौटते हैं। इस साल भी ख्वाजा साहब के 813वें उर्स के दौरान दोनों देशों के बीच शांति और सहयोग का संदेश दिया गया।


