शोभना शर्मा, अजमेर। 813वें ख्वाजा गरीब नवाज उर्स के अवसर पर भारत-पाकिस्तान तीर्थ यात्रा समझौता 1974 के तहत पाकिस्तानी जायरीन का जत्था अजमेर पहुंचने वाला है। इस बार 6 और 7 जनवरी 2025 की रात में करीब 107 पाकिस्तानी जायरीन विशेष ट्रेन से अजमेर पहुंचेंगे। यह जत्था 10 जनवरी तक अजमेर में रुकेगा और उर्स में भाग लेकर दरगाह में चादर चढ़ाने के साथ जियारत करेगा।
प्रशासन की विशेष तैयारियां
पाकिस्तानी जायरीन के लिए प्रशासन ने ठहरने और अन्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था की है। उन्हें केंद्रीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, पुरानी मंडी में ठहराया जाएगा। यहां उन्हें गर्म पानी, सोने के लिए कमरे और नमाज अदा करने के लिए ओपन हॉल जैसी सुविधाएं दी गई हैं। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया है ताकि जायरीन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आने-जाने का समय और नियम
जायरीन 6 और 7 जनवरी 2025 की रात में वाघा बॉर्डर से भारत आएंगे और 7 जनवरी को सुबह 6:10 बजे दिल्ली रेलवे स्टेशन से रवाना होकर दोपहर 1:00 बजे अजमेर पहुंचेंगे। अजमेर में रहने के दौरान जायरीन का सी-फॉर्म 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन सबमिट करना अनिवार्य है। 10 जनवरी को ये जायरीन पाकिस्तान लौट जाएंगे।
जायरीन के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हर वक्त उनके साथ एक पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवान मौजूद रहेगा। दरगाह आने-जाने के लिए सेंटर गर्ल्स स्कूल से विशेष वाहन की व्यवस्था की गई है। हालांकि, उन्हें स्थानीय बाजार में खरीदारी या किसी अन्य व्यक्ति से मिलने की अनुमति नहीं होगी।
पहली बार छठी के दिन आगमन
अंजुमन सैयदजादगान के उर्स कन्वीनर सैयद हसन हाशमी ने बताया कि यह पहली बार है जब पाकिस्तानी जायरीन “छठी के दिन” उर्स में भाग लेंगे। 7 जनवरी को सुबह 11:00 बजे “छठी की फातिहा” की रस्म शुरू होगी। इस बार जायरीन का दल छोटा है, लेकिन उनकी उपस्थिति के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।
813वें उर्स में खास आकर्षण
ख्वाजा गरीब नवाज का उर्स पूरे भारत और विदेशों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां जियारत करने आते हैं। पाकिस्तानी जायरीन का आगमन इस उर्स को और भी खास बनाता है। प्रशासन और दरगाह कमेटी ने जायरीन के स्वागत और सुविधाओं को प्राथमिकता दी है।
सांप्रदायिक सौहार्द और धार्मिक परंपरा का प्रतीक
अजमेर उर्स न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक भी है। यह उर्स भारत की समृद्ध विरासत और ख्वाजा गरीब नवाज की शिक्षाओं को दर्शाता है।


