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JJM घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से संजय बड़ाया को मिली जमानत

JJM घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से संजय बड़ाया को मिली जमानत

मनीषा शर्मा ।  जलग्रहण प्रबंधन (JJM) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किए गए संजय बड़ाया को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्वनाथन की खंडपीठ ने संजय बड़ाया की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए जमानत का आदेश दिया। संजय बड़ाया की गिरफ्तारी ईडी द्वारा 16 जुलाई को की गई थी। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका 11 नवंबर को खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सबूतों का अवलोकन करते हुए यह निर्णय दिया कि ट्रायल में अभी लंबा समय लग सकता है और संजय बड़ाया को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।

संजय बड़ाया और महेश जोशी के रिश्ते का विवाद

संजय बड़ाया, जो कि राजस्थान के पूर्व मंत्री महेश जोशी का करीबी माने जाते हैं, उन पर आरोप है कि उन्होंने महेश जोशी के नाम पर करोड़ों रुपए की रिश्वत ली। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी द्वारा महेश जोशी को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है।

कोर्ट की टिप्पणी:

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महेश जोशी के खिलाफ कोई सीधा आरोप अभी तक ईडी द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसके बावजूद संजय बड़ाया पर रिश्वत के आरोप लगाए गए हैं, जो कि मंत्री महेश जोशी के नाम से करोड़ों रुपए लेने से जुड़े हैं।

जमानत का आधार: सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं

संजय बड़ाया की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि गिरफ्तारी के बाद वह 140 दिनों से जेल में बंद हैं और ट्रायल की प्रक्रिया में अभी लंबा समय लगने वाला है।

ईडी की आपत्ति और कोर्ट की प्रतिक्रिया:

  1. ईडी का आरोप:ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि संजय बड़ाया ने आरोपी कंपनियों से रिश्वत की राशि प्राप्त की थी और राजस्थान पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग) के अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश की।

  2. कोर्ट की टिप्पणी:सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में 8000 से अधिक दस्तावेज प्रमाण के तौर पर जमा किए गए हैं। साथ ही 50 गवाहों का परीक्षण भी हो चुका है। ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है।

  3. ट्रायल की समय सीमा:कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रायल की प्रक्रिया में अभी और समय लगेगा। इसलिए संजय बड़ाया को हिरासत में रखने का कोई ठोस कारण नहीं है।

अन्य आरोपियों को मिली जमानत और समानता का आधार

इस मामले में संजय बड़ाया अकेले आरोपी नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि मामले के एक अन्य आरोपी पीयूष को भी पहले ही जमानत मिल चुकी है। पीयूष पर 8.87 करोड़ रुपए का लाभ उठाने का आरोप है, जबकि संजय बड़ाया पर 3.30 करोड़ रुपए प्राप्त करने और उनके पिता के बैंक खाते में 1.05 करोड़ रुपए पहुंचने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए कहा कि जब अन्य आरोपी को जमानत मिल चुकी है, तो संजय बड़ाया को भी जमानत दी जानी चाहिए।

JJM घोटाला: मामला कैसे शुरू हुआ?

JJM घोटाले का यह पूरा मामला पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज किया गया था। बाद में ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज करते हुए जांच शुरू की।

  1. प्रारंभिक आरोप:आरोप है कि जलग्रहण प्रबंधन (JJM) योजनाओं के लिए आवंटित करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई। इस योजना के तहत जल आपूर्ति प्रोजेक्ट्स के लिए ठेके दिए गए थे, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ।

  2. ईडी की जांच:मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के दौरान ईडी ने संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार कंपनियों से रिश्वत के रूप में बड़ी राशि ली और इसे अपने और परिवार के खातों में स्थानांतरित किया।

घोटाले में सामने आए मुख्य आरोप:

  1. संजय बड़ाया पर आरोप:

    • कुल राशि: 3.30 करोड़ रुपए
    • पिता के बैंक खाते में पहुंचे: 1.05 करोड़ रुपए
  2. अन्य आरोपी पीयूष:

    • लाभ की राशि: 8.87 करोड़ रुपए
  3. महेश जोशी:

    • पूर्व मंत्री महेश जोशी पर संजय बड़ाया के जरिए रिश्वत लेने के आरोप लगे। हालांकि, ईडी ने अभी तक उन्हें आरोपी नहीं बनाया है।

सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष और जमानत आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए संजय बड़ाया को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि:

  1. ट्रायल में अभी लंबा समय लगेगा।
  2. सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है।
  3. अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर हैं।

इस आधार पर संजय बड़ाया को राहत देते हुए जमानत मंजूर की गई।

भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ईडी की कार्रवाई

ईडी पिछले कुछ समय से विभिन्न राज्यों में मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रही है। राजस्थान का JJM घोटाला इसका ताजा उदाहरण है। ईडी के इस कदम से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिली है। हालांकि, विपक्ष द्वारा कई बार ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया गया है।

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