शोभना शर्मा। भारत के राजनीतिक इतिहास में पहली बार उप-राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया है। यह प्रस्ताव विपक्षी गठबंधन INDIA द्वारा राज्यसभा में लाया गया, जिसमें सभापति और उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर पक्षपात और संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं। इस अभूतपूर्व कदम ने भारतीय राजनीति में नई चर्चा का विषय पैदा कर दिया है।
विपक्ष का आरोप: धनखड़ की भूमिका पर सवाल
विपक्ष का कहना है कि धनखड़ सदन की अध्यक्षता करते समय पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हैं और विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं देते। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे मजबूरी का कदम बताते हुए कहा कि विपक्षी दलों के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था। धनखड़ पर यह भी आरोप है कि वह सत्तारूढ़ पार्टी के हितों के अनुरूप सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं। पिछले कुछ महीनों में, कई बार विपक्षी दलों और धनखड़ के बीच तीखी बहस हुई।
प्रमुख घटनाएं जिनके कारण महाभियोग प्रस्ताव लाया गया
- मानसून सत्र विवाद (अगस्त 2024):
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला पहलवान विनेश फोगाट से जुड़ा मुद्दा उठाया, जिसे धनखड़ ने राजनीतिक मुद्दा बताकर रोक दिया। - सभापति का रवैया:
विपक्षी सांसदों को चुप कराना और बार-बार फटकार लगाना धनखड़ के व्यवहार का हिस्सा रहा है। TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन को “अशोभनीय आचरण” का आरोप लगाकर बाहर निकालने की चेतावनी दी गई थी। - संसदीय परंपराओं की अनदेखी:
विपक्ष का आरोप है कि धनखड़ ने संसदीय नियमों का पालन करने की बजाय सत्तारूढ़ दल के एजेंडे को बढ़ावा दिया।
महाभियोग प्रस्ताव की संवैधानिक प्रक्रिया
उप-राष्ट्रपति को हटाने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत यह प्रक्रिया अपनाई जाती है:
- नोटिस:
महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना आवश्यक है। - विचार और मतदान:
प्रस्ताव पर राज्यसभा में बहस होगी और कुल सदस्यों के बहुमत से पारित होना आवश्यक है। इसके बाद, यह प्रस्ताव लोकसभा में जाएगा, जहां साधारण बहुमत से पारित होने पर उप-राष्ट्रपति को हटाया जा सकता है। - अध्यक्षता:
जब उप-राष्ट्रपति पर महाभियोग प्रस्ताव लंबित हो, तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
INDIA गठबंधन की रणनीति और स्थिति
राज्यसभा में विपक्षी गठबंधन INDIA के पास कुल 84 सांसद हैं। अन्य दलों के समर्थन से भी यह संख्या 95 तक ही पहुंचती है, जबकि बहुमत के लिए 116 सांसदों की आवश्यकता है। यह स्पष्ट है कि संख्या बल के अभाव में प्रस्ताव पारित होना मुश्किल है।
विपक्ष का उद्देश्य
महाभियोग प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य विपक्ष की एकता को प्रदर्शित करना और जनता के सामने यह संदेश देना है कि उप-राष्ट्रपति का व्यवहार निष्पक्ष नहीं है।
राजनीतिक निहितार्थ और गठबंधन की स्थिति
- INDIA गठबंधन की एकता:
यह प्रस्ताव गठबंधन में चल रही नेतृत्व की खींचतान को भी उजागर कर सकता है। - विपक्षी दलों की मजबूती:
प्रस्ताव से यह पता चलेगा कि गठबंधन में शामिल सभी दल कांग्रेस के नेतृत्व में कितने एकजुट हैं। - भविष्य की राजनीति पर असर:
अगर प्रस्ताव असफल होता है, तो यह विपक्ष की कमजोरियों को उजागर करेगा।
राज्यसभा में सत्ता का समीकरण
फिलहाल राज्यसभा में सत्तारूढ़ दल (NDA) का बहुमत है। यह स्थिति विपक्ष के प्रस्ताव के सफल होने की संभावना को और कम कर देती है।
संभावित परिणाम
- धनखड़ की स्थिति मजबूत हो सकती है:
अगर प्रस्ताव खारिज होता है, तो यह दिखाएगा कि सत्तारूढ़ गठबंधन अभी भी मजबूत है। - विपक्ष को नैतिक बढ़त मिल सकती है:
भले ही प्रस्ताव पारित न हो, विपक्ष यह दावा कर सकता है कि उसने लोकतंत्र को बचाने का प्रयास किया। - गठबंधन में दरार:
अगर सभी दल कांग्रेस के पक्ष में मतदान नहीं करते, तो इससे गठबंधन की एकता पर सवाल उठ सकते हैं।


