मनीषा शर्मा, अजमेर। राजस्थान के अजमेर में स्थित पीसीपीएनडीटी कोर्ट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार को एक महिला ने अदालत में जज के साथ अभद्र व्यवहार किया, जिससे कोर्ट की कार्यवाही बाधित हो गई। इस घटना के बाद महिला के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कर लिया गया है।
घटना का पूरा विवरण
गुरुवार को कोर्ट में दहेज उत्पीड़न के मामले की सुनवाई चल रही थी। कोर्ट परिसर में महिला अचानक चिल्लाने लगी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहने लगी कि “मुझे इस कोर्ट से न्याय की उम्मीद नहीं है। जब तक मेरी पत्रावली किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर नहीं होती, मैं इस मामले को यहां नहीं चलने दूंगी।” इस अप्रत्याशित घटना के कारण अदालत की कार्यवाही बाधित हो गई। कोर्ट रीडर और वहां मौजूद अन्य अधिकारी महिला को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन महिला और उग्र होती गई। महिला ने गुस्से में कहा, “आप चाहे मुझे जेल भेज दें, लेकिन मैं इस कोर्ट में अपने केस की सुनवाई नहीं होने दूंगी।”
कोर्ट परिसर में हंगामा
महिला के जोर-जोर से चिल्लाने के कारण कोर्ट परिसर में हंगामा हो गया। इस दौरान वहां तैनात महिला पुलिसकर्मी उसे कोर्ट के बाहर ले गईं। इसके बावजूद महिला का गुस्सा शांत नहीं हुआ। कोर्ट रीडर ने मामले की सूचना सिविल लाइन थाने को दी।
राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज
कोर्ट रीडर द्वारा सिविल लाइन थाने में दी गई शिकायत के आधार पर महिला के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने महिला पर आरोप लगाया है कि उसने सुनवाई के दौरान न केवल न्यायाधीश के साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया, बल्कि कोर्ट की कार्यवाही में भी बाधा डाली।
शिकायत में दर्ज विवरण
शिकायत के अनुसार, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के अधिकारी गवाह करण सिंह का मुख्य परीक्षण करवा रहे थे। इसी बीच महिला ने चिल्लाना शुरू कर दिया। कोर्ट रीडर ने महिला को शांत करने की कोशिश की, लेकिन वह और उग्र हो गई। महिला ने जज से सीधे कहा, “जब तक मेरी शिकायत किसी दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर नहीं होती, मैं इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने दूंगी।”
पुलिस जांच शुरू
सिविल लाइन थाना प्रभारी छोटूलाल ने बताया कि महिला पर जज के साथ अभद्र व्यवहार करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना की जांच सिविल लाइन थाना पुलिस की सब-इंस्पेक्टर भारती गिर्राज कर रही हैं।
महिला की न्याय प्रक्रिया पर आपत्ति
महिला ने कोर्ट में न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। उसकी मांग थी कि उसका मामला किसी अन्य कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। इस दौरान उसने अपनी नाराजगी अभद्र भाषा और व्यवहार के माध्यम से जाहिर की।
कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
कोर्ट में ऐसी घटनाएं न्याय प्रक्रिया को बाधित करती हैं और कानूनन राजकार्य में बाधा डालने के तहत दंडनीय अपराध हैं। इस मामले में महिला पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समाज और न्याय व्यवस्था पर असर
इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा पर सवाल खड़े किए हैं। अदालतें आम जनता को न्याय दिलाने का मंच हैं, लेकिन इस प्रकार की घटनाएं न केवल कार्यवाही को बाधित करती हैं, बल्कि समाज में कानून-व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी पैदा कर सकती हैं।


