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इमामबाड़े विवाद में विधायक बालमुकुंद आचार्य पर कोर्ट जांच करेगी

इमामबाड़े विवाद में विधायक बालमुकुंद आचार्य  पर कोर्ट जांच करेगी

राजस्थान के हवामहल क्षेत्र से विधायक बालमुकुंद आचार्य पर शिया समुदाय के धार्मिक स्थल इमामबाड़े में जबरन घुसने और अभद्रता करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में जयपुर महानगर द्वितीय की न्यायिक मजिस्ट्रेट-14 की कोर्ट ने जांच के आदेश दिए हैं।

जज आयुषी गोयल ने परिवादकर्ता रियाज हुसैन को 28 नवंबर को सबूत पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला तब सामने आया, जब परिवादी ने विधायक और उनके सहयोगियों पर इमामबाड़े में जबरन घुसने, अमर्यादित भाषा बोलने और धार्मिक वैमनस्य फैलाने के आरोप लगाए।

क्या है पूरा मामला?

बांसबदनपुरा निवासी रियाज हुसैन ने आरोप लगाया है कि 21 अक्टूबर की शाम विधायक बालमुकुंद आचार्य अपने समर्थकों के साथ शिया समुदाय के वक्फ संपत्ति इमामबाड़े में घुस गए। उन्होंने वहां अमर्यादित भाषा का उपयोग किया और महिलाओं व बच्चों के साथ अभद्रता की।

परिवादी के वकीलों मोहम्मद असलम खान और वसीम खान के अनुसार, जब वहां मौजूद इमाम ने विधायक को जूते उतारने के लिए कहा, तो विधायक ने अपशब्द कहते हुए उन्हें “आतंकी” तक कह डाला। इस दौरान उन्होंने इमामबाड़े में लगे वक्फ संपत्ति के बोर्ड पर आपत्ति जताई।

सोशल मीडिया पर प्रसारण का आरोप

परिवाद में कहा गया है कि विधायक ने घटना का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण किया। उनका उद्देश्य धार्मिक वैमनस्यता फैलाना और इमामबाड़े की प्रतिष्ठा को खराब करना था। इस घटना के सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद हैं, जो पूरी घटना को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं।

पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

रियाज हुसैन ने बताया कि 21 अक्टूबर की घटना के बाद 29 अक्टूबर को गलता गेट थाने और डीसीपी को शिकायत दर्ज करवाई गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी प्रकार, 26 अगस्त को भी शिया समुदाय के धार्मिक जुलूस के दौरान विधायक ने आपत्तिजनक शब्द कहे थे, जिस पर ब्रह्मपुरी थाने में शिकायत की गई थी।

कोर्ट का निर्णय

5 नवंबर को दायर किए गए परिवाद पर कोर्ट ने संज्ञान लिया और जज आयुषी गोयल ने मामले की जांच का फैसला किया। उन्होंने कहा कि 28 नवंबर को सबूत पेश किए जाएं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

विधायक बालमुकुंद आचार्य पर आरोप क्यों गंभीर हैं?

  1. धार्मिक वैमनस्यता: आरोप है कि विधायक ने इमामबाड़े में जाकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
  2. सोशल मीडिया प्रसारण: घटना का प्रसारण कर समाज में तनाव फैलाने का प्रयास किया गया।
  3. अभद्रता और अपशब्द: महिलाओं, बच्चों और इमाम के साथ अभद्रता की गई।
  4. पुलिस की निष्क्रियता: बार-बार शिकायतों के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिससे मामला कोर्ट तक पहुंचा।

क्या कहते हैं वक्फ संपत्ति के नियम?

वक्फ संपत्ति धार्मिक या समुदायिक उपयोग के लिए सुरक्षित रहती है। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति का जबरन घुसना या वहां विवाद खड़ा करना कानूनन अपराध है। इस मामले में विधायक का व्यवहार इन नियमों का उल्लंघन है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह मामला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। विधायक पर लगे आरोप धार्मिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।

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