शोभना शर्मा। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC) का उद्देश्य दक्षिण एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप को एक बुनियादी ढांचा नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है। यह पहल आर्थिक और व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देने और चीन की बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) का मुकाबला करने के लिए शुरू की गई है। इस परियोजना में बंदरगाह, रेल नेटवर्क, शिपिंग लेन, सड़कें, अंडरसी केबल और सौर ग्रिड शामिल हैं, जो वैश्विक व्यापार में दक्षता बढ़ाने में मदद करेंगे। IMEEC में भारत के साथ अमेरिका, यूएई, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ भी शामिल हैं।
IMEEC के प्रमुख उद्देश्य और संभावित लाभ
IMEEC का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य भारत और सहयोगी देशों को एक ऐसा नेटवर्क देना है जिससे वैश्विक व्यापार के समय और लागत में कमी हो सके। इसके माध्यम से शिपिंग समय में 40% तक की कटौती होने का अनुमान है, जिससे भारतीय व्यापार को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, यह पहल चीन के बीआरआई के बढ़ते प्रभाव का एक रणनीतिक जवाब है, और इसमें भारत को वैश्विक व्यापार में एक प्रभावशाली भूमिका देने का अवसर है।
भारत को मिलने वाले लाभ
IMEEC का महत्व भारत के लिए कई पहलुओं में है। यह पहल भारत को पश्चिम एशिया और यूरोप के देशों के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने में सहायक साबित हो सकती है। इस गलियारे से भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे सकता है। इसके माध्यम से भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है और डिजिटल व्यापार में नए मानक स्थापित कर सकता है।
IMEEC की चुनौतियाँ
इस परियोजना के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं। पश्चिम एशिया का हिस्सा होने के कारण IMEEC को क्षेत्रीय संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता से जूझना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में कई देशों के बीच पुराने प्रतिद्वंद्विता और विवाद हैं, जो इस गलियारे की सफलता में बाधा बन सकते हैं। इसके अलावा, इंटरमॉडल परिवहन (रेल, समुद्री और सड़क परिवहन का संयोजन) से संबंधित जटिलताएँ और बढ़ी हुई लागत भी परियोजना की सफलता पर सवाल खड़ा करती हैं।
IMEEC का भविष्य और भारत की भूमिका
IMEEC के जरिए भारत को वैश्विक व्यापार में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने का अवसर मिल रहा है। इसमें शामिल देशों को भू-राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक ठोस कार्यान्वयन योजना तैयार करनी होगी। IMEEC की सफलता न केवल भारत बल्कि इसमें शामिल अन्य देशों के लिए भी लाभदायक साबित हो सकती है।


