शोभना शर्मा। राजस्थान में उपचुनाव के प्रचार के अंतिम चरण में चैरासी विधानसभा सीट पर राजनीतिक तापमान उबाल पर है। भाजपा और कांग्रेस के बीच चुनावी जंग के दौरान विवादित बयानों, धमकियों और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। सांसद राजकुमार रोत (MP Rajkumar Roat) ने इस गरमाई सियासत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Chief Minister Bhajanlal Sharma) पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राजस्थान का राजनीतिक माहौल और भी गरमा गया है।
चैरासी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार कारीलाल ननोमा के समर्थन में सभा के दौरान, सांसद राजकुमार रोत ने एक वीडियो के जरिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर खुद को जान से मारने की धमकी दिए जाने का दावा किया। रोत ने अपने पोस्ट में कहा कि उन्हें एक सार्वजनिक मंच से जान से मारने की धमकी दी गई, और अगर उनके या उनके समर्थकों को कुछ होता है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
धमकी का वीडियो और राजकुमार रोत का बयान
सांसद राजकुमार रोत ने 1 मिनट 58 सेकंड का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है और बीजेपी के पदाधिकारियों ने सार्वजनिक मंच पर अमर्यादित भाषा का उपयोग किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेताओं ने अपने समर्थकों को उन्हें मारने की खुली छूट दी। रोत ने इस मामले में प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर उन्हें या उनके समर्थकों को कुछ होता है तो इसके लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री जिम्मेदार होंगे।
रोत का कहना है कि यह धमकी न केवल उनके राजनीतिक अधिकारों का हनन है, बल्कि लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने अपनी पार्टी के लिए प्रचार करते हुए यह आरोप लगाया कि बीजेपी की सरकार आदिवासी समाज को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
सीएम भजनलाल शर्मा पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप
सांसद रोत ने सीएम भजनलाल शर्मा और चिखली पंचायत समिति के सरपंच कांतिलाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सीएम की सभा के लिए रास्ते में जा रहे लोगों को जबरदस्ती गाड़ियों में बैठाकर सभा स्थल पर लाया गया, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। रोत ने आरोप लगाया कि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और इसके लिए भाजपा पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरपंच कांतिलाल के बयान पर विवाद
इस विवाद को और बढ़ाते हुए चिखली पंचायत समिति के ग्राम पंचायत बडगामा के सरपंच कांतिलाल ने आदिवासी समाज से जुड़ी नीतियों पर टिप्पणी की, जिसने सांसद राजकुमार रोत को नाराज कर दिया। कांतिलाल ने बीजेपी की सभा में कहा कि आदिवासी लड़कियों की शादी मुस्लिम समाज के लड़कों से नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सांसद रोत ने पहले एक बयान में आदिवासी लड़कियों की शादी मुस्लिम युवकों से कराने की बात कही थी। कांतिलाल ने मंच से कहा कि ऐसे लोगों को आदिवासी समाज से बाहर किया जाना चाहिए।
राजकुमार रोत का जवाब और ‘बाप’ की नीति पर कटाक्ष
राजकुमार रोत ने सरपंच के इस बयान का विरोध करते हुए इसे आदिवासी समाज के लिए अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा और मुख्यमंत्री भजनलाल आदिवासी समाज को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं और ‘बाप’ (भारत आदिवासी पार्टी) की नीति को बदनाम कर रहे हैं। रोत ने कहा कि आदिवासी समाज को कमजोर करने की कोई भी साजिश सफल नहीं होगी, और वे इस मामले में सरपंच कांतिलाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
चुनाव प्रचार में गहराता विवाद
चुनावी सभा के दौरान दिए गए बयान और आरोप-प्रत्यारोप ने राजस्थान के इस उपचुनाव को और अधिक जटिल बना दिया है। राजकुमार रोत और मुख्यमंत्री भजनलाल के बीच यह विवाद भाजपा और कांग्रेस के बीच केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है। राजकुमार रोत ने इसे बीजेपी की सोची-समझी साजिश बताया, जबकि भजनलाल और उनके समर्थकों ने इसे आदिवासी समाज के संरक्षण का प्रयास करार दिया।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
भाजपा की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि रोत द्वारा लगाए गए आरोप केवल सहानुभूति बटोरने के लिए किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह भाजपा के प्रति जनता के समर्थन को कमजोर करने का प्रयास है। इसके साथ ही, पार्टी के पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अगर सांसद रोत को किसी प्रकार की धमकी मिली है, तो प्रशासन इस पर उचित कदम उठाएगा।
चैरासी विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में सांसद राजकुमार रोत और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच उभरते विवाद ने चुनावी पारा और भी बढ़ा दिया है। राजकुमार रोत द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप और धमकी का वीडियो पोस्ट करने से सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल इस चुनावी जंग में अपने-अपने आधारों को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस विवाद का अंतिम परिणाम आने वाले समय में चुनावी समीकरणों पर क्या प्रभाव डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।


