राजस्थान के कोटा में भीषण गर्मी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले कई दिनों से लगातार पड़ रही तेज गर्मी और लू के बीच मंगलवार को तापमान में हल्की गिरावट जरूर दर्ज की गई, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। शहर का अधिकतम तापमान मंगलवार को 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री रहा। तापमान में कुछ कमी आने के बावजूद पिछले दस दिनों से पारा लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
सोमवार को कोटा ने गर्मी का नया रिकॉर्ड दर्ज किया था। शहर का तापमान 45.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने अप्रैल महीने के पिछले आठ वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इतनी तेज गर्मी ने आम जनजीवन के साथ-साथ बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए अब शहर में स्कूलों में अवकाश घोषित करने की मांग तेज हो गई है।
भीषण गर्मी को लेकर वकीलों और अभिभावक प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर पीयूष सांमरिया को ज्ञापन सौंपकर स्कूलों में छुट्टियां घोषित करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि इस झुलसा देने वाली गर्मी का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सुबह के समय भी तापमान तेजी से बढ़ जाता है और स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को धूप और लू का सामना करना पड़ता है।
हाल ही में प्रशासन ने गर्मी को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया था, लेकिन अब अभिभावकों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। शहर में सुबह आठ बजे से ही धूप तेज हो जाती है और गर्म हवाओं का असर महसूस होने लगता है। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए रोजाना स्कूल जाना जोखिम भरा साबित हो सकता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए।
शहर में गर्मी का असर सड़कों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह के शुरुआती घंटों के बाद ही बाजारों और मुख्य मार्गों पर सन्नाटा पसरा नजर आने लगता है। विशेषकर सुबह 11 बजे के बाद शहर की कई सड़कें लगभग सुनसान हो जाती हैं। बहुत जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। जो लोग बाहर निकलते हैं, वे चेहरे ढककर, पानी की बोतल साथ लेकर और धूप से बचाव के उपाय करते दिखाई देते हैं।
इस बार अप्रैल महीने में कोटा के मौसम में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। महीने की शुरुआत में जहां मौसम सामान्य था, वहीं अब तापमान तेजी से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती गर्म हवाओं का असर हाड़ौती क्षेत्र पर भी पड़ रहा है, जिसके कारण कोटा में गर्मी लगातार तीखी बनी हुई है।
तेज गर्मी का असर केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानवरों और पक्षियों पर भी साफ नजर आ रहा है। शहर के राजकीय संग्रहालय परिसर में बने फाउंटेन में बंदरों का झुंड पानी में उतरकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश करता देखा गया। बंदर बार-बार पानी में कूदते और डुबकियां लगाते नजर आए। यह दृश्य दर्शाता है कि प्राकृतिक जीव भी इस तपिश से परेशान हैं और ठंडक पाने के लिए पानी का सहारा ले रहे हैं।
मंगलवार को गर्मी से जुड़ी एक और घटना सामने आई, जब शहर में ईथास अस्पताल के पीछे खड़ी एक स्कूटी में आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह अत्यधिक गर्मी मानी जा रही है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक स्कूटी पूरी तरह जल चुकी थी। इस घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है कि अत्यधिक तापमान का असर वाहनों और अन्य उपकरणों पर भी पड़ सकता है।
अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष भारत सिंह ने कहा कि कोटा में बढ़ती गर्मी और लू के कारण सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। तापमान ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्थिति की गंभीरता समझते हुए तुरंत कदम उठाने चाहिए।
परिषद के महासचिव शंभू सोनी ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए इस मौसम में रोजाना स्कूल जाना खतरनाक होता जा रहा है। बच्चों में लू लगने, डिहाइड्रेशन, चक्कर आने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बनी हुई है। यही कारण है कि अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है।
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों में तत्काल प्रभाव से अवकाश घोषित किया जाए। परिषद का कहना है कि यह केवल छुट्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील मामला है। यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।
फिलहाल कोटा के लोग मौसम में राहत का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी से तुरंत राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों की नजर अब अगले फैसले पर टिकी हुई है। शहर में सबसे बड़ी चिंता यही है कि भीषण गर्मी के बीच बच्चों और आम लोगों को सुरक्षित कैसे रखा जाए।


