latest-newsचित्तौड़गढ़राजस्थान

दीवाना शाह के 84वें उर्स में उमड़ा जनसैलाब, कपासन दरगाह पहुंचे जायरीन

दीवाना शाह के 84वें उर्स में उमड़ा जनसैलाब, कपासन दरगाह पहुंचे जायरीन

शोभना शर्मा।  चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन कस्बे में स्थित सूफी संत हजरत दीवाना शाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर 84वां उर्स रविवार को बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर देशभर से हजारों की संख्या में जायरीन दरगाह पहुंचे। सुबह से ही दरगाह परिसर में जायरीन की भीड़ उमड़ पड़ी थी। दरगाह पर कुल की रस्म दोपहर से पहले जोहर की नमाज से पहले अदा की गई, जिसमें हजारों जायरीन शामिल हुए।

दरगाह परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं। कुल के छींटे लेने के लिए जायरीन सुबह से ही दरगाह परिसर में जुटे हुए थे। आस्ताना ए आलिया में आयोजित महफिल में देशभर से आए सूफी कव्वालों ने बारी-बारी से कलाम पेश कर माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। श्रद्धालुओं ने कव्वालों के सूफियाना कलामों के बीच झूमकर दीवाना शाह को खिराजे अकीदत पेश किया।

रेलवे प्रशासन ने जायरीन की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की। कपासन रेलवे स्टेशन पर 9 एक्सप्रेस ट्रेनों का अस्थायी ठहराव किया गया, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके। स्टेशन और दरगाह परिसर पर यात्रियों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। दरगाह क्षेत्र में 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

दरगाह परिसर को भव्य विद्युत सज्जा से सजाया गया। रंग-बिरंगी लाइटों और पारंपरिक झूमरों से सजाए गए दरगाह परिसर में रात का नज़ारा बेहद आकर्षक रहा। वहीं, जायरीन को मौसम की स्थिति से राहत देने के लिए 6 बड़े डॉम का निर्माण भी करवाया गया है ताकि बारिश और धूप से बचाव हो सके।

धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सहयोग भी हुआ। दरगाह देग में इस बार 21 क्विंटल भोजन तैयार किया गया, जिसमें 6 क्विंटल चावल, 6 क्विंटल शक्कर और 2 क्विंटल सूखे मेवे समेत अन्य सामग्री का उपयोग किया गया। यह भोजन सभी जायरीन में प्रसाद रूप में वितरित किया गया।

यह दरगाह राजस्थान की सबसे बड़ी दरगाहों में से एक मानी जाती है। करीब 30 बीघा क्षेत्र में फैली इस दरगाह का प्रमुख आकर्षण बुलंद दरवाजा है, जिसकी ऊंचाई 70 फीट है। आस्ताना ए आलिया में बने दरवाजे, फाटक और कटघरा पांच क्विंटल से अधिक चांदी से निर्मित हैं। वहीं, गुम्बद के शीर्ष पर एक किलो से अधिक सोने से बना कलश स्थापित किया गया है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाता है।

मेला ग्राउंड में 400 से अधिक दुकानों का आवंटन किया गया। इनमें खाद्य सामग्री, सजावटी वस्तुएं, इत्र, टोपी और अन्य धार्मिक वस्तुएं शामिल रहीं। मेला प्रशासन और स्थानीय समितियों ने जायरीन के लिए ठहरने, भोजन और चिकित्सा व्यवस्था के साथ समर्पित सेवाएं दीं।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading