शोभना शर्मा। जयपुर की फैमिली कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि शादी के बाद यदि कोई महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ अफेयर में रहती है, तो वह तलाकशुदा पति से भरण पोषण की हकदार नहीं होगी। यह निर्णय कोर्ट ने एक तलाकशुदा महिला द्वारा अपने पूर्व पति से भरण पोषण की मांग को खारिज करते हुए दिया। जज वीरेंद्र कुमार जसूजा की अदालत ने इस मामले में कहा कि तलाक की वजह गैर मर्द से संबंध होना था, इसलिए महिला को भरण पोषण का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट में क्या था मामला?
फैमिली कोर्ट के अधिवक्ता डीसी शेखावत ने बताया कि इस मामले में दंपति का तलाक 16 अगस्त 2019 को हुआ था। तलाक के बाद महिला ने अपने पति से भरण पोषण के तौर पर 40 लाख रुपये और 30 तोला सोने की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पति की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि तलाक का मुख्य कारण पत्नी के गैर मर्द से अवैध संबंध थे, जो शादी से पहले और बाद तक जारी रहे।
महिला के पूर्व पति, जो दूरसंचार विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं, का कहना था कि उसकी पहली पत्नी का निधन हो चुका है और उसके पहले विवाह से एक बेटा भी है। वर्तमान स्थिति में वह अपनी मां और बेटे के जीवन यापन की जिम्मेदारी निभा रहा है और इस स्थिति में वह तलाकशुदा पत्नी को भरण पोषण के रूप में इतनी बड़ी राशि नहीं दे सकता।
कोर्ट का निर्णय और तर्क
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि महिला का अपने पड़ोसी के साथ शादी से पहले और शादी के बाद भी अवैध संबंध था, जो तलाक की मुख्य वजह बनी। कोर्ट ने इन अवैध संबंधों को मानसिक क्रूरता के रूप में स्वीकार किया। जज वीरेंद्र कुमार जसूजा ने अपने फैसले में कहा कि महिला के गैर मर्द से संबंध के कारण ही तलाक हुआ और इसलिए वह भरण पोषण की हकदार नहीं हो सकती।
मानसिक क्रूरता मानी कोर्ट ने
फैमिली कोर्ट ने अपने फैसले में अवैध संबंधों को मानसिक क्रूरता करार दिया। कोर्ट का मानना था कि जब कोई महिला शादी के बाद भी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध रखती है, तो यह न केवल पति के लिए अपमानजनक है, बल्कि मानसिक रूप से भी उसे आघात पहुंचाता है। इस तरह के मामलों में तलाकशुदा पत्नी अपने पति से भरण पोषण की मांग नहीं कर सकती।
महिला के आरोप और कोर्ट का रुख
महिला ने कोर्ट में अपने पति से 40 लाख रुपये और 30 तोला सोने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने यह मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक का मुख्य कारण महिला के गैर मर्द से संबंध थे, जो शादी से पहले और बाद तक जारी रहे। ऐसे में महिला का भरण पोषण का दावा कानूनी तौर पर टिकाऊ नहीं माना गया।
क्या है भरण पोषण का कानूनी आधार?
भारतीय कानून के तहत, तलाकशुदा पत्नी को पति से भरण पोषण पाने का अधिकार है, बशर्ते वह आर्थिक रूप से निर्भर हो और उसके पास खुद की आय का कोई साधन न हो। हालांकि, यदि तलाक का कारण अवैध संबंध या मानसिक क्रूरता है, तो पत्नी को भरण पोषण नहीं दिया जा सकता।
इस मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध संबंध होने पर पत्नी को भरण पोषण का हकदार नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता के बराबर है।
फैसले का असर
जयपुर फैमिली कोर्ट का यह फैसला तलाकशुदा महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है, खासकर उन मामलों में जहां तलाक का कारण अवैध संबंध होते हैं। यह फैसला उन महिलाओं के लिए चेतावनी है जो शादी के बाद भी अन्य व्यक्तियों के साथ संबंध रखती हैं और फिर तलाक के बाद भरण पोषण की मांग करती हैं। कोर्ट का रुख यह बताता है कि ऐसे मामलों में केवल आर्थिक निर्भरता का दावा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नैतिक और वैवाहिक जिम्मेदारियों का भी पालन करना होगा।


