राजस्थान में जब भी मारवाड़ और शेखावाटी के रेतीले धोरों में तेज हवा चलती थी, तो वह अपने साथ सिर्फ धूल ही नहीं, बल्कि पानी की कमी की पीड़ा भी लेकर आती थी। दशकों से यहां के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करते रहे हैं। लेकिन बजट 2026 ने इस संघर्ष को उम्मीद में बदलने का संकेत दे दिया है। उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दीया कुमारी ने विधानसभा में जिस घोषणा के साथ बजट पेश किया, उसने प्रदेश के सूखे कंठों में नई जान फूंक दी है।
30 साल का इंतजार खत्म, यमुना का पानी राजस्थान तक
सीकर, झुंझुनूं और चूरू जैसे जिलों के लिए यमुना नदी का पानी अब तक एक सपना ही था। पिछले लगभग 30 वर्षों से यमुना जल परियोजना से जुड़ी फाइलें सरकारी दफ्तरों में धूल फांकती रहीं। कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन इस महत्वाकांक्षी योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
बजट भाषण में दीया कुमारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल और केंद्र सरकार के साथ हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) ने इस लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि यमुना नदी से राजस्थान के हिस्से का पानी लाने के लिए 32,000 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
केवल परियोजना नहीं, भविष्य का आधार
दीया कुमारी ने इस योजना को केवल एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी हुई है। शेखावाटी और मारवाड़ जैसे इलाकों में पानी की उपलब्धता न केवल जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी, बल्कि रोजगार, खेती और उद्योग के नए रास्ते भी खोलेगी। उनके अनुसार, यह योजना राजस्थान के उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी, जहां भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है और बारिश का पैटर्न भरोसेमंद नहीं रहा है।
बजट 2026 और ‘विकसित राजस्थान 2030’ का विजन
विधानसभा में बजट भाषण के दौरान जब यमुना जल परियोजना का जिक्र हुआ, तो सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। दीया कुमारी ने कहा कि बजट 2026 ‘विकसित राजस्थान 2030’ की मजबूत नींव रखता है। जल, कृषि और आधारभूत संरचना को केंद्र में रखकर यह बजट तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का आधार भी है। जब खेतों तक पानी पहुंचेगा, तो उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में इजाफा होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
शेखावाटी की जमीन फिर होगी हरी-भरी
यमुना जल परियोजना से शेखावाटी क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से यह इलाका सूखे और अकाल की मार झेलता रहा है। पीने के पानी के साथ-साथ सिंचाई की सुविधा मिलने से यहां की खेती को नया जीवन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में जल संकट काफी हद तक कम हो जाएगा और लोगों का पलायन भी रुकेगा।
पानी के साथ संरक्षण पर भी जोर
वित्त मंत्री ने केवल पानी लाने की घोषणा ही नहीं की, बल्कि उसके संरक्षण और कुशल उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राजस्थान में केवल 24 प्रतिशत कृषि क्षेत्र ही सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में है। सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 51 प्रतिशत तक ले जाना है। इसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष में 1,340 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत लाया जाएगा।
3 लाख किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
बजट 2026 में किसानों के लिए यह बड़ी सौगात मानी जा रही है। सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं से प्रदेश के लगभग 3 लाख किसानों को जोड़ा जाएगा। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकों से कम पानी में अधिक पैदावार संभव होगी। इससे न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि खेती की लागत भी घटेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि जल प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई तकनीक ही राजस्थान की कृषि को आत्मनिर्भर बना सकती है।
राजनीति से ऊपर उठकर विकास की पहल
यमुना जल परियोजना को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। लंबे समय से लंबित इस योजना का आगे बढ़ना यह संकेत देता है कि पानी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिए जा रहे हैं।
बदलते राजस्थान की तस्वीर
कुल मिलाकर बजट 2026 में यमुना जल परियोजना और सूक्ष्म सिंचाई पर दिया गया जोर राजस्थान के भविष्य की दिशा तय करता दिख रहा है। यह बजट न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक स्थायी और विकसित राजस्थान की परिकल्पना भी करता है। अगर योजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो शेखावाटी और मारवाड़ के धोरों में बहती हवा अब प्यास नहीं, बल्कि खुशहाली की खुशबू लेकर आएगी।


