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गवाह सुरक्षा और महिला अधिकार: नए आपराधिक कानून की दिशा में कदम

गवाह सुरक्षा और महिला अधिकार: नए आपराधिक कानून की दिशा में कदम

शोभना शर्मा।  1 जुलाई से लागू हो रहे नए आपराधिक कानूनों के तहत इलेक्ट्रॉनिक समन, गवाह सुरक्षा, और महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं। भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 पुराने ब्रिटिश कानूनों का स्थान लेंगे।

नए कानूनों के तहत समन अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दिए जा सकते हैं, जिससे कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और कागजी काम में कमी आएगी। महिलाओं के खिलाफ कुछ अपराधों में पीड़ित के बयान महिला मैजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किए जाएंगे, और उनकी अनुपस्थिति में पुरुष मैजिस्ट्रेट किसी महिला की मौजूदगी में यह कार्य करेंगे।

आरोपी और पीड़ित दोनों को 14 दिनों के भीतर प्राथमिकी, पुलिस रिपोर्ट, आरोपपत्र, बयान और अन्य दस्तावेज प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। अदालतें मामले की सुनवाई में अधिकतम दो बार ही स्थगन कर सकती हैं, जिससे अनावश्यक विलंब से बचा जा सके।

राज्य सरकारों के लिए गवाह सुरक्षा योजना लागू करना अनिवार्य किया गया है, जिससे गवाहों की सुरक्षा और सहयोग सुनिश्चित होगा। ‘लैंगिकता’ की परिभाषा में ट्रांसजेंडर को शामिल किया गया है, जिससे समावेशिता और समानता को बढ़ावा मिलेगा।

महिलाओं, 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 60 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों, दिव्यांग और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को थाने आने से छूट दी गई है, और वे अपने निवास स्थान पर ही पुलिस सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

सामुदायिक सेवा का प्रावधान छोटे-मोटे अपराधों के लिए रखा गया है, जिससे अपराधियों को समाज में सकारात्मक योगदान देने का मौका मिलेगा।

संसद ने पिछले साल शीतकालीन सत्र में इन विधेयकों को पारित किया था।

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