अगर आप इन दिनों म्यूचुअल फंड में निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, तो मिड कैप म्यूचुअल फंड आपके लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकता है। बीते कुछ समय में इस कैटेगरी के फंड्स ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मिड कैप फंड्स ने पिछले एक साल में करीब 29 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया है, जो कई लार्ज कैप और हाइब्रिड फंड्स से बेहतर माना जा रहा है।
हालांकि, ज्यादा रिटर्न के साथ इसमें जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए मिड कैप फंड उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त माने जाते हैं, जो बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन करने की क्षमता रखते हैं और लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं।
मिड कैप म्यूचुअल फंड क्या होते हैं
मिड कैप म्यूचुअल फंड ऐसे इक्विटी फंड होते हैं, जिनका निवेश मुख्य रूप से मिड कैप कंपनियों के शेयरों में किया जाता है। मिड कैप कंपनियां वे होती हैं, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन आमतौर पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक और 20,000 करोड़ रुपये से कम होता है। इसके अलावा, शेयर बाजार में मार्केट कैप के आधार पर 101वीं से 250वीं रैंक के बीच आने वाली कंपनियों को भी मिड कैप कंपनियों की श्रेणी में रखा जाता है।
ये कंपनियां न तो बहुत छोटी होती हैं और न ही पूरी तरह स्थापित दिग्गज। अक्सर ये कंपनियां ग्रोथ के चरण में होती हैं, इसलिए इनमें तेजी से आगे बढ़ने की क्षमता होती है। इसी वजह से मिड कैप फंड्स में रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन जोखिम भी लार्ज कैप फंड्स की तुलना में अधिक रहता है।
ज्यादा रिटर्न की चाह, लेकिन रिस्क समझना जरूरी
मिड कैप फंड में निवेश करने से पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता को समझना बेहद जरूरी है। लार्ज कैप फंड्स की तुलना में मिड कैप फंड्स ज्यादा अस्थिर हो सकते हैं। बाजार में गिरावट आने पर मिड कैप शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, जिससे फंड की वैल्यू पर भी असर पड़ता है।
इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि मिड कैप फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं, जो अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराते नहीं हैं और निवेश को बीच में छोड़ने की बजाय लंबे समय तक टिके रह सकते हैं। अगर आप कम जोखिम चाहते हैं या बहुत जल्द पैसा निकालने की योजना है, तो मिड कैप फंड आपके लिए सही विकल्प नहीं हो सकता।
लंबी अवधि में क्यों दिखता है बेहतर प्रदर्शन
मिड कैप फंड्स का असली फायदा लंबी अवधि में नजर आता है। जब निवेशक 5 साल या उससे अधिक समय के लिए इन फंड्स में निवेश करते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव का असर काफी हद तक संतुलित हो जाता है। लंबी अवधि में अच्छी मिड कैप कंपनियां अपने बिजनेस को विस्तार देती हैं, जिससे उनके शेयरों की कीमत में वृद्धि होती है और इसका सीधा फायदा निवेशकों को मिलता है। यही कारण है कि वित्तीय सलाहकार अक्सर मिड कैप फंड्स को लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का अच्छा साधन मानते हैं, बशर्ते निवेशक धैर्य बनाए रखे।
पोर्टफोलियो में कितना हिस्सा लगाना सही
एक्सपर्ट्स की मानें तो मिड कैप फंड में अपने पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा लगाना समझदारी नहीं होती। संतुलित पोर्टफोलियो के लिए मिड कैप फंड में 20 से 30 प्रतिशत तक निवेश करना उचित माना जाता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर आपके पास निवेश के लिए कुल 100 रुपये हैं, तो उसमें से 20 से 30 रुपये मिड कैप फंड में लगाए जा सकते हैं। बाकी राशि लार्ज कैप, डेट फंड या अन्य सुरक्षित विकल्पों में निवेश कर पोर्टफोलियो को संतुलित रखा जा सकता है। इससे जोखिम भी सीमित रहता है और रिटर्न की संभावना भी बनी रहती है।
SIP के जरिए निवेश क्यों है बेहतर तरीका
मिड कैप फंड में निवेश करने के लिए एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP का रास्ता ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। SIP के तहत निवेशक हर महीने एक तय रकम फंड में निवेश करता है।
इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बाजार के उतार-चढ़ाव का असर औसत हो जाता है। जब बाजार नीचे होता है, तब आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार ऊपर होता है, तब कम यूनिट्स। लंबे समय में यह रणनीति निवेश की लागत को संतुलित कर देती है और जोखिम को भी कम करती है।
निवेश से पहले क्या रखें ध्यान
मिड कैप फंड चुनते समय फंड का ट्रैक रिकॉर्ड, फंड मैनेजर का अनुभव और निवेश रणनीति को समझना जरूरी है। केवल हालिया रिटर्न देखकर फैसला करना सही नहीं माना जाता। साथ ही, यह भी जरूरी है कि निवेशक अपनी वित्तीय जरूरतों, निवेश लक्ष्य और समय अवधि को ध्यान में रखकर ही मिड कैप फंड में निवेश करें। अगर सही योजना और धैर्य के साथ निवेश किया जाए, तो मिड कैप म्यूचुअल फंड लंबे समय में मजबूत रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।


