सफर करना आमतौर पर आनंददायक अनुभव होता है, लेकिन कई लोगों के लिए कार या बस में बैठना परेशानी भरा बन जाता है। जैसे ही यात्रा शुरू होती है, जी मिचलाने लगता है, सिर घूमने लगता है और कई बार उल्टी तक हो जाती है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की इंद्रियों और संतुलन तंत्र के बीच तालमेल बिगड़ने का परिणाम है।
आंख और कान के बीच तालमेल बिगड़ने से होती है दिक्कत
मोशन सिकनेस तब होती है जब शरीर की अलग-अलग इंद्रियां मस्तिष्क को विरोधाभासी संकेत भेजती हैं। आंखें, आंतरिक कान और नसें मिलकर संतुलन बनाए रखती हैं। जब व्यक्ति चलती गाड़ी में बैठकर मोबाइल देखता है या किताब पढ़ता है, तो आंखों को लगता है कि शरीर स्थिर है, जबकि कान का संतुलन तंत्र गति को महसूस कर रहा होता है। इन अलग-अलग संकेतों से मस्तिष्क भ्रमित हो जाता है और मतली, चक्कर व बेचैनी शुरू हो जाती है।
बंद वाहन और हवा की कमी भी बढ़ाती है परेशानी
कार या बस के अंदर ताजी हवा न मिलने से भी मोशन सिकनेस बढ़ जाती है। बंद खिड़कियों के कारण ऑक्सीजन की कमी और गंध से जी मिचलाने लगता है। खाली पेट यात्रा करना या बहुत भारी भोजन करके निकलना भी इस समस्या को गंभीर बना सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और माइग्रेन से पीड़ित लोगों में यह परेशानी अधिक देखी जाती है।
लापरवाही बरतने पर क्या हो सकता है नुकसान
यदि मोशन सिकनेस को नजरअंदाज किया जाए, तो सफर का अनुभव पूरी तरह खराब हो सकता है। बार-बार उल्टी होने से शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। यात्रा पूरी होने के बाद भी कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर बने रह सकते हैं। कुछ लोगों में यह समस्या मानसिक डर का रूप ले लेती है, जिससे अगली यात्रा से पहले ही घबराहट शुरू हो जाती है।
सफर के दौरान बचाव के आसान और असरदार उपाय
मोशन सिकनेस से बचने के लिए कुछ सरल उपाय बेहद कारगर होते हैं। यात्रा के दौरान आगे की सीट पर बैठना और नजर सामने सड़क पर टिकाए रखना मददगार होता है। खिड़कियां थोड़ी खुली रखें, ताकि ताजी हवा मिलती रहे। सफर से पहले हल्का भोजन करें, न बहुत ज्यादा खाएं और न ही खाली पेट रहें। अदरक या नींबू का सेवन जी मिचलाने की समस्या को कम करता है। यात्रा के दौरान मोबाइल और किताब से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह कब जरूरी होती है
अगर हर सफर में मोशन सिकनेस की समस्या गंभीर रूप ले लेती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। चिकित्सक की सलाह से यात्रा से पहले एंटी-मोशन सिकनेस दवा ली जा सकती है, जिससे उल्टी और चक्कर से राहत मिलती है।
थोड़ी जागरूकता से बन सकता है सफर सुखद
मोशन सिकनेस कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है। सही जानकारी, जागरूकता और कुछ छोटी-छोटी सावधानियों से सफर को आरामदायक और आनंददायक बनाया जा सकता है। अगली बार यात्रा पर निकलते समय इन बातों का ध्यान रखें और बिना परेशानी के सफर का आनंद लें।


