खगोलीय घटनाओं में हमेशा से लोगों की रुचि रही है। विशेषकर सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण जैसी घटनाओं को लेकर वैज्ञानिक समुदाय और धार्मिक विचार वाले लोग दोनों ही उत्सुक रहते हैं। अमावस्या या पूर्णिमा की तिथि आने पर ग्रहण की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो जाती हैं, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण काल के दौरान पूजा-पाठ, शुभ कार्य और नए कार्यों की शुरुआत को वर्जित माना जाता है। वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण को केवल एक सामान्य खगोलीय घटना माना जाता है। इसी बीच 17 फरवरी 2026 को लगने वाले ग्रहण को लेकर सोशल मीडिया और न्यूज जगत में व्यापक चर्चा है।
क्या वास्तव में 17 फरवरी 2026 को सूर्य ग्रहण लगेगा
वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जिसके दौरान सूर्य एक चमकती अंगूठी जैसा दिखाई देगा। इस घटना को वैज्ञानिक भाषा में एनुलर सोलर इक्लिप्स कहा जाता है। यह ग्रहण फाल्गुन अमावस्या के दिन घटित होगा और विश्व के कुछ हिस्सों में ही दिखाई देगा।
वलयाकार सूर्य ग्रहण कैसे बनता है
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब बनता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, परंतु पृथ्वी से दूरी अधिक होने की वजह से वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। ऐसे में सूर्य के चारों ओर एक चमकीला छल्ला दिखाई देता है जिसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। यह दृश्य अत्यंत आकर्षक और दुर्लभ माना जाता है, इसलिए खगोल विज्ञान प्रेमियों में इस घटना को लेकर काफी उत्सुकता रहती है।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा यह सूर्य ग्रहण
सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि 17 फरवरी 2026 को लगने वाला यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा और धार्मिक गतिविधियों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। भारतीय लोग सामान्य रूप से अपने दैनिक कार्य और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के कर सकेंगे।
सूर्य ग्रहण का समय
17 फरवरी 2026 को यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा, मध्य 5 बजकर 42 मिनट पर रहेगा और समाप्ति रात 7 बजकर 57 मिनट पर होगी। भारत में न दिखने के कारण इसका कोई सीधा प्रभाव देश पर नहीं पड़ेगा।
सूर्य ग्रहण के दौरान जरूरी सावधानियाँ
वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि सूर्य ग्रहण को सीधे आंखों से नहीं देखना चाहिए। इसके लिए विशेष इक्लिप्स ग्लास का उपयोग आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं को पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान सिलाई-बुनाई जैसे कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन लोग अपनी आस्थाओं के अनुसार सावधानियाँ अपनाते हैं।


